कुवैत में फंसे दलित युवकों की रिहाई के प्रयास तेज

हालांकि उनका दो साल का वर्क परमिट अप्रैल 2011 में खत्म हो गया था। 60 युवकों का समूह राज्य के विभिन्न ट्रैवल एजेंटों के जरिये दो साल की कार्य अनुमति पर कुवैत गया था। कुवैत की एक निर्माण कंपनी ने अप्रैल 2009 में इन युवकों को दो साल के लिए नौकरी पर रखा था लेकिन अब उनके पासपोर्ट जब्त कर लिये गये। परमार ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है और आयोग कुवैत में फंसे इन दलितों को जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए अपनी ओर से पूरा प्रयास करेगा। परमार ने कहा कि इस संबंध में आयोग इन युवकों के परिजनों की भी हर संभव मदद करेगा और उनकी समस्याओं को जरूरी मंचों पर उठाएगा।
परिजनों का कहना है कि अप्रैल 2011 में अनुबंध समाप्त होने के बाद इस पूरे समूह को हिरासत में ले लिया गया। कंपनी उनकी रिहाई के लिए पैसों की मांग कर रही है। ये युवक गरीब तबके के हैं। उन्होंने कहा कि आयोग जल्द ही इस संबंध में बैठक करके आगे की रणनीति पर चर्चा करेगा। इससे पहले पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने कुवैत में हिरासत में लिये गये इन दलित युवकों की रिहाई के लिए केन्द्र के हस्तक्षेप की मांग की थी।
राज्य आयोग के अध्यक्ष राजेश बाघा ने कहा था, हमने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से युवकों की रिहाई के मकसद से कुवैत पर राजनयिक दबाव बनाने के लिए विदेश मंत्रालय को निर्देश देने का आग्रह किया है। बाघा ने कहा कि राज्य आयोग केन्द्रीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से भी गुहार लगाएगा। इन युवकों के परिवार वाले बेचैनी से उनकी रिहाई का इंतजार कर रहे हैं।












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