बसपा राज में नहीं शुरू हो पाया इटावा में ट्रॉमा सेन्टर

सूत्रों का कहना है कि इस बारे में कई बार लिखा पढ़ी हुई लेकिन सभी फाइलें शासन पहुंचकर थम गयीं। गौरतलब है कि सपा सरकार के समय में इटावा में एक ट्रामा सेन्टर का प्रस्ताव केन्द्र सरकार ने पास किया। प्रस्ताव स्वीकृत होने की बाद ताबड़तोड़ काम शुरू हुआ लेकिन इसी बीच प्रदेश में सरकार बदली और प्रदेश का नेतृत्व बसपा के हाथ आ गया। चिकित्सालय के लिए धनराशि तो जारी हो चुकी थी जिस कारण कार्यदायी संस्था ने कार्य पूरा कर दिया और दो वर्ष पूर्व ट्रामा सेन्टर का भवन बनकर तैयार हो गया। अधिकारियों की माने तो बसपा ने ट्रामा बनने में कोई अडंग़ा नहीं लेकिन चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं की।
चिकित्सकों की तैनाती व चिकित्सकीय उपकरणों की आपूर्ति न होने से सेन्टर शुरू नहीं हो सका। कानपुर आगरा के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग से लगा ट्रामा सेन्टर में आज भी सन्नाटा पसरा दिखायी देता है। ट्रामा सेन्टर संचालन के लिये जिला अस्पताल से ट्रेङ्क्षनग के लिये 24 डाक्टरों के नाम भी मांगे गये। अस्पताल प्रशासन ने अप्रैल 2010 में डाक्टरों के नाम तो भेज दिये लेकिन आगे की कार्रवाई नहीं हुई। सेन्टर शुरू कराने के लिये जिला अस्पताल एवं जिला प्रशासन द्वारा बराबर पत्र लिखे जाने के बाद भी अब तक इसका संचालन नहीं हो पाया है। सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में 21 अक्टूबर 2010 को निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को और 15 नवम्बर 2010 को मंडलीय निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को पत्र लिखे गये लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।












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