रालेगण सिद्दी में तैयार होंगे करप्शन खत्म करने वाले बहादुर

उन्होंने कहा कि जनलोकपाल बिल अगर लागू हो जाता है तो भ्रष्टाचार पर ब्रेक लगेगा। लेकिन देश आगे तभी बढ़ेगा जब गांवों का विकास होगा। बड़ी संख्या में उनके आंदोलन से देश का युवा जुड़ रहा है। हजारों युवाओं ने उनके मूवमेंट से जुड़ने के लिए पत्र भेजे हैं। इन युवाओं में से भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही लड़ाई को लड़ने और गांवों के विकास के लिए वालंटियर तैयार किए जाएंगे। वसुंधरा स्थित मेवाड़ इंस्टीट्यूट में इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के 150 कार्यकर्ताओं का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हुआ। इसमें अन्ना अपनी पूरी टीम के साथ पहुंचे। संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि केवल भ्रष्टाचार के खात्मे से देश आगे नहीं बढे़गा। रचनात्मक कार्यों को गति देना भी जरूरी है।
अन्ना ने बताया कि कौशांबी स्थिति आईएसी के कार्यालय में करीब 400 युवाओं ने पत्र भेजकर उनके मूवमेंट से जुड़ने की इच्छा जताई। उनमें से 150 युवाओं का चयन किया गया। जिन्हें चर्चा करने के लिए बुलाया गया है कि वह आंदोलन के लिए कितना समय देंगे और कैसे काम करेंगे। इसी तरह से चार हजार पत्र रालेगण सिद्दी में भी आए हैं। चर्चा का अगला चरण रालेगण सिद्दी में होगा। अन्ना ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जनलोकपाल बिल लाने को लेकर हमारा आंदोलन चल ही रहा है लेकिन हमारा संकल्प गांवों के विकास का भी है। भ्रष्टाचार भले ही कम हो जाए लेकिन जब तक गांवों का विकास नहीं होगा तब तक देश का भविष्य बेहतर होने वाला नहीं है।
अन्ना ने बताया कि कुछ युवाओं ने कहा है कि उन्होंने शादी नहीं की है और वह आगे शादी भी नहीं करेंगे। पूरा जीवन उनके मूवमेंट को देना चाहते हैं। ऐसे युवाओं को अन्ना ने रालेगण सिद्दी में विशेष ट्रेनिंग दिलाने की बात कही। युवाओं में लीडरशिप विकसित कर उन्हें बेहतर कार्यकर्ता बनाया जाएगा। ऐसे कार्यकर्ताओं को गांवों के विकास से जोड़ा जाएगा। अन्ना हजारे और उनके प्रमुख साथी अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए अनशन में शरीक होने के लिए कांग्रेसी नेताओं को भी पत्र भेजा गया था।
शरद पवार को भी पत्र गया था। अब वह आए तो इसमें क्या किया जा सकता है। मनीष शिशौदिया और कुमार विश्वास ने कहा कि कांग्रेसी नेता कह रहे हैं कि अन्ना के मंच पर दूसरे दलों के नेता भी थे। जब संसद में कांग्रेस के नेता दूसरे दलों के नेताओं के साथ बैठ सकते हैं तो अन्ना के मंच पर बैठने में क्या दिक्कत थी। साफ है कांग्रेस के नेताओं की मंशा ही खराब है।












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