संतोष फिर चाहते हैं संसद की सुरक्षा करना, तीन को किया था ढेर

शौर्य चक्र से सम्मानित सीआरपीएफ हेड कांस्टेबल डी संतोष कुमार कहते हैं कि बच्चे कई बार संसद में वो जगह दिखाने को कह चुके हैं जहां आतंकियों से भिड़ंत हुई थी लेकिन मुझे नहीं मालूम कि दस साल पहले किया ये वादा मैं कब पूरा करूंगा।
तब बम निरोधक दस्ते में तैनात संतोष कुमार ने संसद पर हमले के दौरान अकेले ही तीन आतंकियों को मौत केघाट उतारा था। उनका कहना है कि दोबारा मैं कभी वहां नहीं पहुंचा जहां जिंदगी को मायने देने वाली घटना हुई थी। संसद हमले के बाद उन्हें कश्मीर, उत्तर-पूर्व समेत कई जगह तैनात किया गया। मालूम हो कि संसद हमले केदौरान मारे गए छह सुरक्षा कर्मियों में चार दिल्ली पुलिस केऔर सीआरपीएफ व पार्लियामेंट वाच एंड वार्ड स्टाफ का एक-एक कर्मचारी शामिल है।
शौर्य चक्र से सम्मानित संतोष कुमार केएक और सहयोगी सब इंस्पेक्टर वाई बी थापा कहते हैं कि संसद हमले केदौरान उनकेबच्चे काफी छोटे थे। वह फिर से संसद भवन में तैनाती की बाट जोह रहे हैं ताकि ताकि बच्चों को संसद परिसर में वह स्थान दिखाया जा सके जहां उन्होंने आतंकियों से लोहा लिया था।
शहीद सीआरपीएफ कांस्टेबल कमलेश कुमारी केपति अवधेश सिंह बताते हैं कि दस साल बाद भी मेरी दो बेटियों को यकीन नहीं होता कि मां हमेशा केलिए उनसे दूर चली गई हैं। कन्नौज में पेट्रोल पंप चलाने वाले अवधेश कहते हैं कि संसद हमले केवक्त मेरी बेटियां छोटी थीं। टीवी पर संसद को देखकर हमेशा वे भावुक हो जाती हैं। सरकार ने कमलेश केशहादत केसम्मान में उनकेपरिजनों को पेट्रोल पंप दिया था।












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