मुंशी जी की लिखा पढ़ी समाप्त, ऑन लाइन होगा अपराधियों का रिकॉर्ड

Crime
लखनऊ। अब एक जिले में किसी अपराध को अंजाम देकर दूसरे जिले में जिन्दगी बिताना आसान नहीं होगा क्योंकि अब पलक झपकते ही घटना, घटनास्थल और घटना में शामिल व्यक्तियों की पूरी जानकारी सिटी सर्विलांस व इंटरनेट के जरिए देश के कोने-कोने में पहुंच जाएगी। भारत सरकार के ई- गवर्नेंस मिशन मोड प्रोजेक्ट क्राइम एंड क्रिमिनल्स ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से अपराधियों से जुड़ी सभी जानकारियों को ऑन लाइन कर दिया जाएगा।

इस सिस्टम से प्रदेश ही नहीं पूरे देश के थाने को एक दूसरे से जोड़ा जाएगा। इस प्रणाली के आने के बाद थाने में बैठे मुंशी जी की लिखा पढ़ी भी लगभग समाप्त हो जाएगी। उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी शाखा गुरदर्शन सिंह के अनुसार राज्य में सिटिजन चार्टर लागू होने के बाद अब पुलिस प्रणाली में भी बदलाव किया गया है। उनका कहना है कि इस योजना के शुरू होने के बाद किसी भी व्यक्ति द्वारा देश में कहीं भी किए गए अपराधों की जानकारी कम्प्यूटर की एक क्लिक पर ली जा सकेगी।

श्री सिंह के अनुसार प्रदेश के सभी थानों को नेटवर्किंग (इंटरनेट) से जोड़ा जाएगा जिसमें पुलिस महानिदेशक कार्यालय को भी शामिल किया गया है। नयी प्रणाली में पासपोर्ट, चरित्र प्रमाण पत्र, हथियार रखने के लिए लाइसेंस या किसी भी जांच की तत्कालीन स्थिति जानना आसान हो जाएगा। उनका कहना है कि इसके तहत चार राज्यों पाण्डुचेरी, तमिलनाडु, झारखंड और हरियाणा में भी इस योजना पर कार्य किया जा रहा है। तथा इसी सप्ताह उत्तर प्रदेश भी योजना में अनुबंध करेगा। योजना में प्रदेश के 1504 थानों में 2487 कम्प्यूटर लगाए जाएंगे।

इसमें जीआरपी महिला एवं मानवाधिकार थाने भी शामिल किए जाएंगे। योजना के तहत प्रत्येक थाने में चार-चार कम्प्यूटर, क्षेत्राधिकारी से लेकर अपर पुलिस अधीक्षक कार्यालयों में तीन-तीन, पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों के कार्यालयों में दस तथा पुलिस महानिदेशक पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद के अलावा अन्य डीजी या विभाग प्रमुखों के कार्यालय में 50-50 कम्प्यूटर लगाए जाएंगे। इसके लिए एनआईआईटी अपने सर्वर लगाएगा तथा बीएसएनएल के नेटवर्क में यह संचालित होगा।

श्री सिंह ने बताया कि फिलहाल राज्य के 64 जिलों में तकनीकी कार्य लगभग पूरा हो गया है तथा शेष 11 जिलों में भी जल्द काम पूरा होने की उम्मीद है। कांस्टेबल से लेकर अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। देश भर में योजना लागू करने के लिए करीब 2209 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं जिसमें से प्रदेश को 113 करोड़ रूपए मिले हैं। कहा जा रहा है कि यह व्यवस्था के लागू होने के बाद जीडी भरने से लेकर थानों की लिखा पढी कम्प्यूटरों में सीमित हो जाएगी और थानों में मुंशी जी की लिखा पढ़ी भी लगभग समाप्त हो जाएगी।

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