भारत करेगा अफगानिस्‍तान की मदद

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बान। अफगानिस्तान को शांतिपूर्ण और समृद्ध राष्ट्र बनाने में योगदान देने वालों में बाकी दुनिया के साथ आज भारत ने भी हाथ मिलाया ताकि अंतरराष्‍ट्रीय आतंकवाद वहां फिर पनाह न पा सके। अफगानिस्तान को लेकर हुए अंतरराष्‍ट्रीय सम्मेलन के अंत में जारी कए बयान में कहा गया कि अफगानिस्तान की सुरक्षा और स्थिरता को मुख्य खतरा आतंकवाद से है जो क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के लिये भी खतरनाक है।

सम्मेलन की अध्यक्षता जर्मनी ने की और इसमें भारत सहित सौ से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय ने यह साझा प्रतिबद्धता जताई कि अफगानिस्तान को एक बार फिर से अंतरराष्‍ट्रीय आतंकवाद का गढ़ नहीं बनने दिया जाएगा। सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि अफगानिस्तान की सीमा से बाहर उपज रहा आतंकवाद अफगानिस्तान के लिये काफी खतरनाक है।

वहीं अफगानिस्तान के लिए भारत की योजनाओं का खुलासा करते हुए विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने आज कहा कि भारतीय उद्योगों की युद्ध प्रभावित देश में खनन विकसित करने और स्टील संयंत्रा स्थापित करने के लिए 10 अरब डालर से अधिक के निवेश की योजना है। कृष्णा ने अफगानिस्तान पर वैश्विक सम्मेलन में यह घोषणा की।

इस सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के नेता जुटे हैं। अफगानिस्तान को फिर से बनाने के लिए भारत मार्शल प्लान जैसा कुछ करने का पक्षधर है। कृष्णा ने कहा कि अफगानिस्तान को समय, विकास की मदद, विश्व बाजार में प्राथमिक पहुंच और विदेशी निवेश के अलावा एक ऐसी रणनीति बनाने की जरूरत है जिससे यह देश एक बार फिर गृह युद्ध और बाहरी क्षेत्र से प्रायोजित चरमपंथ तथा आतंकवाद में नहीं फंस पाए।

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