शिक्षा का अधिकार कानून पर ग्रहण

न्यायालय की इस पीठ ने सरकार से आरटीई के प्रावधानों के पालन की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे उपायों पर भी रिपोर्ट मांगी है। इस कानून के तहत स्कूलों में गरीब तबके के बच्चों के लिए 25 फीसदी सीटें आरक्षित की गई हैं। संस्था की ओर से पेश हुए वकीलों अशोक अग्रवाल और खगेश झां ने न्यायालय को बताया कि कई स्कूलों ने जानबूझ कर शुरुआती कक्षाओं में सीटों की संख्या घटा दी है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस कानून के सातवें अनुच्छेद के तहत जिला स्तर पर निगरानी समितियां गठित नहीं कर पाई है। मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी। किसी भी देश के विकास की नींव शिक्षा से रखी जाती है शिक्षा से ही विकास का रास्ता खुलता है और गरीबी दूर होती है लेकिन यह क्या शिक्षा के अधिकार कानून में ही भारी उल्टफेर देखने की मिल रही है।












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