लोकपाल के लिए समर्थन जुटाना अन्ना के लिए बड़ी चुनौती

लोकपाल बिल पर जब अन्ना हजारे 16 अगस्त को आंदोलन करने निकले थे तो सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर तिहाड़ भेज दिया था। सरकार की इस करतूत पर देश की जनता अन्ना हजारे के समर्थन में आ जुटी। अन्ना को जनता का समर्थन मिला और विरोध झेल रही यूपीए सरकार ने मजबूरी में अन्ना हजारे को जेल से रिहा कराकर रामलीला मैदान पर अनशन करने की इजाजत दे दी और वो भी बिना किसी शर्त के। 12 दिन तक अन्ना के हमले झेलने के बाद आखिरकार सरकार ने अन्ना को मजबूत लोकपाल बिल का लिखित आश्वासन दे दिया। शीतकालीन सत्र में सरकार ने अपने वादे से कदम पीछे खीचे और अन्ना हजारे ने एक बार फिर अनशन के आंदोलन का अपना हथियार बना लिया।
सरकार को चुनौतियां देने वाले अन्ना हजारे के सामने भी लोकपाल बिल के समर्थन की चुनौती आन पड़ी है। अगस्त में हुए आंदोलन में देश के करोड़ों लोगों ने अन्ना का साथ दिया था। अब जब तीन महीने बीत चुके हैं तो अन्ना एक बार फिर वैसा ही समर्थन हासिल करने में जुट गए हैं। जिसकी शुरुआत टीम अन्ना ने रविवार को दिल्ली में कार और मोटरसाइकिल रैली निकाल कर दी। इस रैली के साथ ही अन्ना 11 दिसंबर को एक दिन का अनशन भी करेंगे। इससे पहले सरकार को चेताते हुए अन्ना हजारे ने कहा है कि 22 दिसंबर को समाप्त होने वाले शीतकालीन सत्र में अगर सरकार ने मजबूत लोकपाल बिल पेश नहीं किया तो वे 27 दिसंबर से दीर्घकालीन अनशन पर बैठ जाएंगें।
अगस्त में हुए आंदोलन और अब 27 दिसंबर को होने वाले आंदोलन की बात करें तो इस बीच टीम अन्ना पर कई तरह के आरोप लगे हैं और टीम में कई मतभेद भी सामने आए हैं। सबसे पहले टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य स्वामी अग्निवेश विवादों के चलते टीम अन्ना से अलग हो गए। जिसके बाद टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल पर भी धोखाधड़ी के आरोप लगे। अरविंद केजरीवाल पर अपनी पुरानी नौकरी को लेकर तो किरण बेदी पर एनजीओ के पैसे का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगा।
अपनी टीम पर लग रहे आरोपों पर सफाई देने के लिए अन्ना हजारे खुलकर सामने आए। इन विवादों के बीच प्रशांत भूषण ने कश्मीर मामले पर बयानबाजी करके टीम अन्ना में मतभेद पैदा कर दिए। जहां प्रशांत भूषण कश्मीर मुद्दे पर जनमत कराने की बात कह रहे थे वहीं अन्ना हजारे ने कश्मीर के लिए जान तक देने की बात कह डाली। प्रशांत भूषण के इस बयान के बाद कश्मीर से जुड़े कुछ लोगों ने प्रशांत भूषण की उनके चैंबर में घुसकर पीटा। इसके बाद टीम अन्ना के सदस्यों को देश में कई जगह निशाना बनाया गया था।
सरकार द्वारा लोकपाल बिल के वायदे के बावजूद भी अन्ना हजारे हिसार में हुए उपचुनावों में कांग्रेस का सीधे तौर पर विरोध करते हुए नजर आए। इस दौरान उन्होंने जनता से कांग्रेस को वोट न देने की अपील भी कर डाली। उन्होंने यह भी कहा कि वे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश सहित 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ प्रचार भी करेंगे। अन्ना के इस कदम को विरोधी पार्टियों को लाभ पहुंचाने वाला करार दिया गया। इस दौरान अन्ना हजारे पर यह आरोप भी लगे कि उनका आंदोलन राजनीति से प्रेरित है।
अन्ना हजारे भी कई तरह के विवादास्पद बयान देने की वजह से विवादों में फंसे। इसमें कृषिमंत्री शरद पवार को पड़े तमाचे पर भी उनका बयान विवाद खड़ा करने वाला था। जिसमें उन्होंने पत्रकारों से पूछा था कि पवार को एक ही थप्पड़ पड़ा। कभी अपनी बात से न पलटने वाले अन्ना हजारे इस बयान पर अपने सुर बदलते हुए नजर आए। एक तरफ जहां अन्ना हजारे इसे जनता का आंदोलन बता रहे हैं वहीं संघ जैसी संस्थाएं यह दावा कर रही हैं कि अन्ना हजारे ने उनके कहने पर ही यह आंदोलन शुरू किया है। अब देखना है कि तमाम तरह के विवाद पैदा होने के बाद भी जनता अन्ना हजारे के इस आंदोलन को उतना ही समर्थन देती है जितना अगस्त में हुए आंदोलन को दिया था।












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