यूपी के रायबरेली शहर का राजनीतिक इतिहास

रायबरेली में फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज को छोड़कर केवल एक मात्र इंदिरा गांधी महिला डिग्री कॉलेज है। यहां पर कई राष्ट्रीय स्तर के संस्थान खुल गए हैं जिनमें राजीव गांधी पेट्रोलियम संस्थान, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नेश्नल इंस्टीटयूट ऑफ फार्मास्युटिकल एंड रिसर्च, फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, फिरोज गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज, फिरोज गांधी पॉलीटेक्निक प्रमुख हैं। लेकिन अभी इन्हें कारगर अस्तित्व में आने के काफी वक्त लगेगा। इसके पीछे राज्य सरकार केन्द्र पर और केन्द्र राज्य सरकार को कोसती है। जिसके बीच में पिसती है रायबरेली की जनता।
रायबरेली के निर्वाचन क्षेत्र में बछरांवा, सैलून, ऊंचाहार, दलमऊ, सरेनी, हरचंदपुर, सताऊं, तीलोई और रायबरेली है। लोगों को उम्मीद है कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में यहां रेलकोच फैक्ट्री जरूर खुलेगी और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। वह सपना जो कि राजीव गांधी का था वो जरूर सोनिया या राहुल पूरा करेंगे। विकास की गति यहां धीमी जरूर है लेकिन फिर भी यहां विकास हो रहा है।
पिछले पांच सालों में रायबरेली की तस्वीर बदली हुई दिखायी देती है। यहां का किसान उतना परेशान नहीं जितना प्रदेश के अन्य शहरों का है। यहां के किसानों की जमीन प्रदेश की अन्य जगहों से महंगी है। राजधानी लखनऊ से सटे होने की वजह से इस शहर में परिवर्तन देखने को मिला है। लखनऊ के विकास का असर रायबरेली पर दिखता है। जो कि सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए। लेकिन रायबरेली की जनता को उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं क्योंकि उनकी आंखों को सपने बहुत बड़े-बड़े दिखाये गये हैं।












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