स्वात घाटी की जांबाज लडकी को मिलेगा शांति पुरस्कार

मलाला उन पीडि़त लड़कियों में शामिल थी, जो तालिबान के फरमान के कारण लंबे समय तक स्कूल जाने से महरूम रह गई। दो साल पहले स्वात घाटी में तालिबान ने लड़कियों के स्कूल जाने पर पाबंदी का तुगलकी फरमान जारी किया था। इस दौर के अपने अनुभवों के आधार पर इस लड़की ने बीबीसी उर्दू सेवा के लिए एक डायरी लिखी।
मलाला आठवीं कक्षा की छात्रा है। उसने 42 देशों की 93 प्रतिभागियों को मात देकर वर्ष 2011 के अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार का नामांकन हासिल किया है। इस पुरस्कार का एलान आज किया जाएगा। अगर मलाला यह पुरस्कार जीतती है तो उसे नोबेल पुरस्कार विजेता डेसमंड टूटू यह सम्मान देंगे। उसके साथ चार अन्य लड़कियों को भी नामांकित किया गया है।












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