किन्नर अग्निकांडः दिल्ली सरकार देगी दो दो लाख का मुआवजा

Delhi Chief Minister Sheila Dikshit
दिल्ली (ब्यूरो)। नंदनगरी की आग के बाद रविवार की रात को ही घटना स्थल पर पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री एके वालिया दुर्घटना की तत्काल जांच के आदेश दे दिए। और घोषणा की कि कल सूबे की मुखिया शीला दीक्षित अग्निकांड प्रभावितों से मिलेगी। इस कड़ी में आज शीला दीक्षित गुरु तेग बहादुर अस्पताल पहुंचीं और अग्निकांड के पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा देने की भी घोषणा की।

आपको बता दें कि पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी इलाके में एक सामुदायिक केंद्र के पंडाल में भीषण आग लगने से यह हादसा हुआ था। दीक्षित ने अस्पताल में पीड़ितों से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, "मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और पीड़ितों की पहचान सत्यापित हो जाने के बाद वे मुआवजा राशि ले सकते हैं।" दीक्षित ने प्रत्येक पीड़ित को 5,000 रुपये की त्वरित राहत राशि देने की घोषणा की। प्रत्येक मृतक के रिश्तेदारों को दो लाख रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी। गम्भीर रूप से घायल प्रत्येक व्यक्ति को 50,000 रुपये की राशि दी जाएगी और जिन्हें हल्की चोटें आई हैं, उन्हें पांच हजार रुपये की राहत राशि दी जाएगी। सामुदायिक केंद्र में अखिल भारतीय किन्नर समाज सर्वधर्म महासम्मेलन का आयोजन चल रहा था। जिसमें पूरे देश से आए हिजड़ा समुदाय के लोग शामिल हुए थे। यह महासम्मेलन रविवार से ही शुरू हुआ था लेकिन उसी दिन हुए हादसे में 16 लोग मारे गए और 50 घायल हो गए। दीक्षित ने अस्पताल अधिकारियों को घायलों का मुफ्त इलाज करने का निर्देश दिया है।

चारों तरफ थी अफरातफरी

पुलिस के सूत्रों ने बताया कि जब हमलोग घटना स्थल पर पहुंचे तो चारों ओर अफरातफरी, चीख पुकार चेहरों पर झलकता खौफ, स्ट्रेचर पर घायलों को लेकर दौड़ते स्वयंसेवक नंदनगरी हादसे का भयावह स्थिति को दर्शा रहे थे। कहीं किसी घायल का हाथ जला था तो किसी का पैर तो किसी का पूरा शरीर। किसी के शरीर पर मांस के जले हुए लटकते लोथडे़ नजर आ रहे थे। यह दृश्य देखकर अस्पताल में लोगों के भी रोंगटे खडे़ हो गए। नंदनगरी हादसे में जले अपनों के चेहरे ढूंढते किन्नर और जब कोई दिखाई नहीं पड़ता तो फूट फूटकर रो पड़ते। ऐसा ही मंजर अस्पताल के अंदर और बाहर दिखाई पड़ा। जिनकी पीड़ा देखकर अस्पताल में अपने रोगियों की तीमारदारी के लिए आए लोग भी किन्नरों की मदद के लिए आगे दिखाई दिए।

हादसों के शिकार हुए किन्नरों में शामिल कलकत्ता से आई तापो सुधबुध खो बैठी है और कुछ भी पूछने पर दहाडे़ मारकर रोने लगी। रोते हुए वह बताती है कि हम कलकत्ता से 35 लोग सम्मेलन में आए थे और अब कौन कहां है? किसी का कुछ पता नहीं लग रहा है। जो लोग जल गए हैं, उसमें भी अपनों की पहचान करना मुश्किल है। दिल्ली की किन्नर प्रीति कहती है कि आग में झुलसे अधिकांश लोग बाहर के हैं और सभी घबराए हुए हैं। जिन्हें आपस में ही एक-दूसरे को ढूंढने में दिक्कत हो रही है। गोरखपुर से आयी लाजवंती बताती है कि उसके साथ 10 किन्नर और आए थे, लेकिन किसी का कुछ नहीं पता लग रहा। अस्पताल में अपने साथियों को ढूंढते किन्नरों के चेहरे पर मौत का खौफ साफ दिखाई दिया।

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