यूपी बंटवारे के खिलाफ पुतला सपा ने फूंका, लाठी छात्रों पर चली

सदन के अंदर यूपी के विभाजन का प्रस्ताव विधानसभा में पारित होते ही बाहर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में रोष व्याप्त हो गया। करीब पचास से ज्यादा कार्यकर्ता विधानसभा की तरफ बढ़े और मायावती का पुतला फूंका। हाईसिक्योरिटी जोन में जैसे ही पुतला फूंका गया, पुलिस ने सपाईयों को दौड़ा लिया। एक भी सपाई पुलिस के हाथ नहीं लगा। लेकिन आंख मूंद कर काम करने वाली पुलिस ने पीछे देखा कि कुछ छात्र विधानभवन की ओर बढ़ रहे हैं। बिना कुछ सोचे समझे पुलिस ने उन पर लाठियां भांज दीं। असल में वो थे बीपीएड के छात्र जो अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, तब उनको पता तक नहीं था कि यूपी के बंटवारे का कोई प्रस्ताव भी पारित हुआ है।
अब अगर खिसियाये हुए विपक्षी दलों की बात करें तो समाजवादी पार्टी के महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि वो मायावती के खिलाफ राज्यपाल के पास जायेंगे। शिवपाल ने कहा कि मायावती ने लोकतंत्र का मजाक उड़ाया है और संविधान का दुरुपयोग किया है। इसलिए वो राज्यपाल से मायावती सरकार को बर्खास्त करने की मांग करेंगे।
उधर विधानसभा भंग करने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने मीडिया से साफ कहा कि वो विधानसभा भंग नहीं करेंगी। उनके पास पूर्ण बहुमत है, लिहाजा वो अपना कार्यकाल पूरा करेंगी। उन्होंने कहा कि रही बात राज्य के बंटवारे में अल्पमत की बात कहना ही गलत है, क्योंकि लेखानुदान बिल पास होने पर विपक्ष ने आपत्ति नहीं जताई, यानी उस समय सरकार बहुमत में थी तो बंटवारे के बिल के वक्त अविश्वास मत का सवाल ही नहीं उठता।
हम आपको बता दें कि मायावती सरकार को बर्खास्त करने की मांग को लेकर शिवपाल सिंह यादव रविवार शाम राज्यपाल से मिले थे। नेता प्रतिपक्ष शिवपाल यादव के नेतृत्व में सपा के एक प्रतिनिधि मण्डल ने राज्यपाल से कहा था कि बसपा सरकार अल्पमत में आ गयी है। सपा सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा का उन्हें पहले से आभास है, उन्हें मिली सूचना के मुताबिक प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जायेगा।
सपा ने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा था, जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख हैं इसलिए सरकार के अलोकतांत्रिक कदमों पर लगाम लगाना उनका अधिकार है। अल्पमत सरकार को तत्काल बर्खास्त करने और लोकतंत्र की बहाली के लिए अन्य आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई थी। प्रतिनिधि मण्डल में विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डे, विधान परिषद में नेता विरोधी दल अहमद हसन, विधायक माता प्रसाद पाण्डे, अम्बिका चौधरी, डा. वकार अहमद, ब्रह्मशंकर त्रिपाठी और अरविंद सिंह गोप शामिल थे।












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