उद्योग संगठन एसोचैम भी अन्‍ना हजारे से सहमत नहीं

दिल्ली

(ब्यूरो)।
देश
का
प्रमुख
उद्योग
संगठन
एसोचैम
भी
सामाजिक
कार्यकर्ता
अन्ना
हजारे
के
उस
मत
से
सहमत
नहीं
है
जिसमें
उन्होंने
प्रधानमंत्री
को
भी
लोकपाल
के
दायरे
में
लाने
की
सिफारिश
की
है।
सूत्रों
ने
बताया
कि
एसोचैम
आज
से
इस
बारे
में
मीडिया
अभियान
शुरू
करने
की
घोषणा
की
है।
उद्योग
मंडल
ने
सुझाव
दिया
है
कि
प्रधानमंत्री
को
लोकपाल
के
दायरे
से
बाहर
रखा
जाना
चाहिए।

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एसोचैम

पहला
उद्योग
मंडल
है
जिसने
इस
पर
अभियान
चलाने
की
घोषणा
की
है।
अन्य
सभी
उद्योग
मंडलों
ने
कमोबेश
अन्ना
हजारे
के
भ्रष्टाचार
के
खिलाफ
चलाए
गए
अभियान
का
समर्थन
किया
है।
हालांकि
एसोचैम
का
मानना
है
कि
प्रधानमंत्री
कार्यालय
के
अधिकार
या
अन्य
व्यावसायिक
फैसलों
की
जांच
के
लिए
एक
तंत्र
होना
चाहिए।
संसद
की
एक
स्थायी
समिति
फिलहाल
इस
विधेयक
पर
चर्चा
कर
रही
है।
सरकार
ने
उम्मीद
जताई
है
कि
संसद
के
शीतकालीन
सत्र
में
यह
विधेयक
पारित
हो
जाएगा।
सरकार
के
प्रयासों
की
सराहना
करते
हुए
एसोचैम
ने
यह
भी
कहा
है
कि
उच्चतम
न्यायालय
और
उच्च
न्यायालय
के
न्यायधीशों
को
भी
लोकपाल
के
दायरे
से
बाहर
रखा
जाना
चाहिए।

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एसोचैम

ने
कहा,
भ्रष्टाचार
या
व्यावसायिक
कदाचार
के
मामलों
के
लिए
एक
व्यापक
न्यायिक
मानक
और
जवाबदेही
कानून
बनना
चाहिए।
एसोचैम
ने
कहा
कि
लोकपाल
के
मामले
में
नियुक्ति
और
अनुशासनात्मक
कार्रवाई
की
शुरुआत,
प्रधानमंत्री,
लोकसभा
में
नेता
प्रतिपक्ष,
राज्यसभा
में
सत्ताधारी
और
विपक्ष
के
नेताओं
तथा
सुप्रीम
कोर्ट
के
प्रधान
न्यायाधीश
को
मिलाकर
एक
उच्चस्तरीय
समिति
द्वारा
की
जानी
चाहिए।
एसोचैम
ने
सुझाव
दिया
कि
भ्रष्टाचार
निवारण
अधिनियम
के
प्रासंगिक
खंड
और
अन्य
इस
तरह
चीजें
लोकपाल
बिल
में
निगमित
होने
चाहिए
जिससे
एक
व्यापक
और
संहिताबद्ध
कानून
बन
सके।

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