नये नियम लागू, असंभव हुई तत्काल लंबी दूरी की सुगम यात्रा

परेशानियों का जिक्र करने से पहले हम बात करते हैं तत्काल टिकट के दो अहम नियमों की। पहला कि टिकट अब एक दिन पहले ही होगा और दूसरा कि टिकट करवाते वक्त यात्री को अपना परिचय पत्र प्रस्तुत करना होगा। चलिये इन दो नियमों को ध्यान में रखते हुए विजय चौहान की बात करें, जो बैंगलोर में विप्रो कंपनी में काम करते हैं और उनका गृह जनपद गोरखपुर है। अब अगर 25 नवंबर को उन्हें अचानक गोरखपुर जाना पड़े तो वो कैसे जायेंगे। जाहिर है नियम के मुताबिक वो 24 तारीख को तत्काल टिकट बुक करवायेंगे, लेकिन कौन सी ट्रेन का? गोरखपुर के लिए तो शुक्रवार को कोई सीधी ट्रेन है ही नहीं।
जाहिर है विजय को झांसी या भोपाल से ब्रेक जर्नी करनी पड़ेगी। अब 24 को उन्हें भोपाल या झांसी तक का टिकट तो मिल जायेगा, लेकिन भोपाल या झांसी से गोरखपुर तक का टिकट वो कहां से लायेंगे? क्योंकि उनका तत्काल टिकट 25 या 26 तारीख को खुलेगा, जब विजय सिंह चौहान ट्रेन में बैठे होंगे। यानी भोपाल या झांसी पहुंचने के बाद विजय को गोरखपुर जाने के लिए या तो किसी ट्रेन के जनरल डिब्बे में धक्के खाने होंगे या जनरल का टिकट लेकर स्लीपर डिब्बे में बैठकर जुर्माना देना पड़ेगा। और नहीं तो उन्हें बस का सहारा लेना पड़ेगा।
यह तो महज उदाहरण है। दक्षिण भारत के किसी भी शहर से उत्तर भारत के किसी भी शहर जाने के लिए अगर सीधी ट्रेन नहीं है, तो आप तत्काल यात्रा आसानी से नहीं कर सकते। कुल मिलाकर देखा जाये तो अपने घरों से हजारों किलोमीटर दूर रहने वालों के लिए तत्काल सेवा सुविधाजनक नहीं रह गई है।












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