बिना एनओसी हो रहा था किन्नरों का सम्मेलन

चीफ फायर ऑफिसर एके शर्मा के मुताबिक, फायर विभाग की ओर से उन्हें एनओसी नहीं दी गई थी। आयोजकों की ओर से विभाग को कोई आवेदन नहीं मिला था। किसी भी आयोजन पर आवेदक की तरफ से आवेदन करने पर एनओसी दी जाती है। अगर वह आवेदन नहीं करते है और कोई आयोजन करते है तो हादसे के लिए वह खुद जिम्मेवार होते हैं। इस तरह के बयान से साफ है कि जिले में अमले को इस बड़े आयोजन से अंजान बनी हुई थी। जबकि करीब 15 दिन से ज्यादा दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 50 हजार से ज्यादा हिजड़ों के पहुंचने की उम्मीद थी। फायर विभाग के पल्ला झाड़ने के बाद हादसे की जांच करने के लिए जिला उपायुक्त राजस्व को सौंप दी गई है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नंद नगरी में नियमों को ताक पर रखकर सम्मेलन चल रहा था। आयोजकों ने स्लम विभाग के समुदाय भवन में गैरकानूनी तौर पर टेंट लगा रखा था। विभाग के दिशा निर्देशों के अनुसार समुदाय भवन में केवल हलवाई के लिए ही छोटा सा टैंट लगाया जा सकता है। जबकि यहां आयोजकों ने परिसर के पूरे खुले स्थान पर टैंट लगा रखा था। वहीं विभागीय अधिकारियों ने भी पूरे मामले के प्रति आंखें बंद कर रखीं थीं। उन्होंने कार्यक्रम से पहले इस बात की जांच करना मुनासिब नहीं समझा कि आयोजक कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रहे हैं। अगर वे कार्यक्रम से पहले आयोजन स्थल का निरीक्षण कर लेते तो यह हादसा टल सकता था क्योंकि वे नियमों का उल्लंघन देख टैंट को हटवा सकते थे।












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