महंगाई की आग में झुलस रही सरकार की विश्वसनीयता

Prime Minister Manmohan Singh and Sonia Gandhi
दिल्ली (ब्यूरो)। महंगाई की आग से सरकार की विश्वसनीयता झुलस रही है। यदि इसे कुछ ही महीने में कम नहीं किया गया तो इसका मतलब यह निकाला जाएगा कि सरकार के पास महंगाई कम करने का कोई उपाय नहीं है। एक निजी टीवी चैनल से साक्षात्कार में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि यह सही है कि महंगाई दर हमारे अनुमान से अधिक है। हमारी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का अनुमान है कि अगले साल की शुरुआत से महंगाई में कमी आएगी।

अहलूवालिया ने कहा, फरवरी में जनवरी का आंकड़ा आ जाएगा, लेकिन यदि तब तक महंगाई में कमी नहीं आती है, तो फिर पता नहीं हम क्या कर रहे हैं। उन्होंने हालांकि विश्वास जताया कि अगले साल मार्च तक महंगाई दर घटकर सात से 7.5 फीसदी तक आ जाएगी। थोक कीमतों पर आधारित सूचकांक जनवरी 2010 के बाद से लगातार दहाई अंकों के करीब बना हुआ है।

अक्टूबर माह की मासिक महंगाई दर 9.73 फीसदी दर्ज की गई। साथ ही पांच नवम्बर को समाप्त सप्ताह में खाद्य महंगाई दर मामूली घटकर 10.63 फीसदी रही। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि दिसम्बर तक महंगाई दर घटकर छह फीसदी की करीब आ जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई को कम करने की कोशिशों के तहत 2010 की शुरुआत से लगातार 13 बार मुख्य दरों में वृद्धि की, लेकिन इसे कम कर पाने में अब तक असफल है।

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