यूपी के बंटवारे का प्रस्ताव पारित कर माया ने खेला बड़ा गेम

जी हां असल में यही है मायावती का पॉलिटिकल गेम जो उन्होंने सोमवार की दोपहर विधानसभा के अंदर खेला। बंटवारे का गेम खेलने के तुरंत बाद मायावती ने मीडिया को बुलाया और अपनी वावाही शुरू कर दी। मायावती ने कहा कि यह मामला 2007 से लटका हुआ था। हमारी सरकार कई सालों से केंद्र सरकार से आग्रह कर रही थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा था। राज्य के बंटवारे के लिए बसपा सरकार ने अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभाई है, अब केंद्र की जिम्मेदारी है, कि उसका क्रियान्वयन करवाकर राज्य को विकास के रथ पर बिठाये।
मायावती ने कहा, "बसपा सरकार के अल्पमत में होने की बात जो विपक्ष कर रहा है, उसका मैं खंडन करती हूं, मैं मीडिया के माध्यम से विरोधी पार्टियों से पूछा चाहती हूं कि यदि नये परिसीमन की वजह से हमारे कुछ विधायकों की सीट गड़बड़ाने के कारण अगर वो स्वेच्छा से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, तो क्या वे मेरी पार्टी में नहीं रहे। लोकायुक्त में हमारे कुछ मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ जांच चल रही है। लिहाजा हमने उनसे इस्तीफा लिया या हटा दिया, जिससे कोई हमारे ऊपर उन्हें बचाने का आरोप नहीं लगा सके।
माया ने कहा कि मैं विरोधी सदस्यों से पूछा चाहती हूं कि क्या ये लोग मेरी पार्टी के सदस्य नहीं रहे हैं। वास्तविकता यह है कि ये सभी विधायक हमारी पार्टी में हैं और रहेंगे। ऐसी स्थिति में विरोधी पार्टी के लोग यह किस आधार पर कह सकते हैं कि हमारी सरकार अल्पमत में आ गई है। चुनाव नहीं लड़ने या टिकट नहीं मिलने पर अगर विपक्षी दल अल्पमत मानमे हैं, तो आंध्र प्रदेश जाकर आंध्र प्रदेश जायें, जहां एक दर्जन से ज्यादा विधायकों ने अलग तेलंगाना की मांग पर स्पीकर को अपने इस्तीफे सौंप दिये।
केंद्र की सरकार के काफी सांसद व मंत्री भ्रष्टाचार के कारण जेल में बंद पड़े हैं। अदालत व एजेंसियों में उनके खिलाफ कार्रवाई चल रही है, लेकिन फिर भी केंद्र सरकार के अल्पमत में होने की बात नहीं कही जाती, तो उत्तर प्रदेश में ऐसा क्यों होता है। सरकार को अल्पमत में कहना विरोधी पार्टियों की सोची समझी दलित-विरोधी चाल है। हमारी सरकार बिलकुल भी अल्पमत में नहीं है। आज भी हमारे पास विधायकों की संख्या पूर्ण बहुमत से ज्यादा है।












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