शीतकालीन सत्र आज से खतरे में मायावती की सरकार

प्रदेश बंटवारे पर तुली बसपा सरकार को विपक्ष की तीखे सवालों का तो सामना करना ही होगा साथ ही यह भी सिद्घ करना होगा कि वह अल्पमत में नहीं है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विपक्ष जहां विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं वहीं सपा ने कहा है कि बसपा सरकार अल्पमत है, इसलिए पहले वह बहुमत सिद्घ करे फिर प्रदेश बंटवारे की बात करे।
हम आपको बताते हैं कि मायावती की गणित कहां गड़बड़ा रही है। असल में मायावती के 40 विधायक उनका साथ छोड़ने की तैयारी कर चुके हैं। इनमें 25 के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण ऐक्शन और टिकट नहीं दिये जाने की वजह से असंतोष व्याप्त है, जबकि 15 की पार्टी सदस्यता रद्द की जा चुकी है। सत्ता खोने का डर ही था कि मायावती ने रविवार की रात दो विधायकों- अवधपाल सिंह और अशोक दोहरे व एक सांसद धनंजय सिंह का निलंबन वापस ले लिया।
इससे पहले शनिवार को बसपा के बगावती नेता बाबू सिंह कुशवाहा ने विपक्ष को एक और मुद्दा दे दिया। विधानसभा के इस आखिरी सत्र में विपक्षी दलों के तेवर मायावती सरकार को लेकर काफी आक्रामक हैं इस बीच मायावती के नजदीकी रहे पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने नसीमुद्दीन सिद्दकी, मंत्रिमंडलीय सचिव शशांक शेखर ङ्क्षसह तथा गृह विभाग के प्रमुख सचिव फतेहबहादुर सिंह ने से अपनी जान को खतरा बताकर विपक्ष को एक और मुद्दा दे दिया।
कुशवाहा को लेकर सत्र में विपक्ष का क्या रूख रहता है यह तो सत्र के दौरान ही पता चलेगा लेकिन सपा ने मायावती सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का एलान पहले ही कर दिया है। उनका दावा है कि बसपा के कई विधायकों की बगावत के बाद सरकार अल्पमत में आ गयी है।
अविश्वास प्रस्ताव पर यदि चर्चा स्वीकार नहीं की गयी तो लोकतांत्रिक ढंग से सदन में विरोध किया जायेगा। कुशवाहा के मामले में सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने आशंका जाहिर करते हुए का कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले में सबूत मिटाने के लिए उप मुख्यचिकित्सा अधिकारी डा वाईएस सचान की तरह कुशवाहा की भी हत्या हो सकती है।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि यदि सदन में राज्य के विभाजन का प्रस्ताव आया तो उसे किसी भी कीमत पर पारित नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि यह सरकार अल्पमत में है। सरकार को पहले सदन में अपना बहुमत सिद्ध करना चाहिए। भाजपा विधानमंडल दल के नेता ओम प्रकाश सिंह ने भी कहा कि उनकी पार्टी पहले अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कराने के लिए दबाव बनायेगी। राज्य के विभाजन का प्रस्ताव यदि लाया गया तो उसका डटकर विरोध किया जाएगा।
उनका कहना था कि प्रस्ताव राज्य के हित को ध्यान में रखकर नहीं लाया जा रहा है बल्कि सरकार अपनी असफलताओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए राज्य के विभाजन का प्रस्ताव ला सकती है। सिंह ने कहा कि यदि सरकार राज्य विभाजन के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग के गठन की मांग सम्बन्धी प्रस्ताव लायेगी तो उसका विरोध नहीं किया जाएगा क्योंकि भाजपा छोटे राज्यों की विरोधी नहीं है लेकिन विस्तृत अध्ययन के बाद ही राज्यों का विभाजन होना चाहिए।
कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रदेश को केन्द्र से मिलने वाले धन के दुरपयोग का मामला जोरशोर से उठेगा। बहरहाल विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने के प्रयास में हैं अब देखना यह है कि सरकार विपक्ष के इन आरोपों से खुद को कैसे बरी कर पाती है।












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