कश्मीर की वादियों में हो सकती है फेसबुक पर पाबंदी

सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने अपनी यह रिपोर्ट खुफिया तंत्र, आतंकी व अलगाववादी संगठनों की आपसी बातचीत के आधार पर तैयार की है। इसमें कहा गया है कि कुछ लोग फेसबुक जैसी सोशल साइटों का इस्तेमाल जहां कश्मीर में अलगाववादी एजेंडे को प्रोत्साहित करने के लिए कर रहे हैं, वहीं वह कुछ ऐसे वीडियो भी अपलोड कर रहे हैं, जिससे कश्मीर में लोग फिर सड़कों पर आ जाएं। बीते दिनों फेसबुक पर इस्लाम विरोधी और गिलानी के खिलाफ जो भी लिखा गया था या अपलोड किया गया था, वह इसी साजिश का हिस्सा है। वर्ष 2010 में कश्मीर में हुई हिंसा को भड़काने में भी फेसबुक जैसी इंटरनेट सोशल साइटों ने प्रमुख भूमिका अदा की है।
इस पर अलगाववादियों और आतंकियों के समर्थकों ने भड़काउ वीडियो अपलोड कर सच्ची झूठी खबरों के जरिए लोगों को देश विरोधी प्रदर्शनों के लिए उकसाया था। अलगाववादियों के इस प्रोपेगंडा के विपरीत फेसबुक पर एक और गुट सक्रिय है, जो उनकी टिप्पणियों पर तल्ख प्रतिक्रिया करते हुए अलगाववादी एजेंडे की बखिया उधेड़ता है। ऐसे में कई बार भड़काउ बातें लिखी जाती हैं, जो कइयों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। बीते दिनों धर्मातरण को लेकर पैदा हुआ विवाद और उस पर फेसबुक पर अचानक ही आपत्तिजनक व नंगी तस्वीरों के साथ ईशनिंदा का प्रकरण महज इत्तेफाक नहीं है।
यह उन्हीं तत्वों की साजिश हो सकती है, जो कश्मीर में हिंसा का आलम बनाए रखना चाहते हैं। उनके लिए फेसबुक व अन्य दूसरी सोशलसाइटें कारगर जरिया साबित हो सकती हैं। वहीं, डीजीपी ने फेसबुक पर कश्मीर में प्रतिबंध लगाए जाने के प्रस्ताव पर कहा कि हम खुद ऐसा नहीं कर सकते। बंद करवाने के लिए राज्य सरकार को केंद्र से आग्रह करना होगा।












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