देखिये विधानसभा के अंदर कैसे हुए उत्तर प्रदेश के चार टुकड़े?

भारतीय संविधान के अंतर्गत कोई भी बिल पास कराने से पहले उस पर चर्चा होनी चाहिये, लेकिन यूपी के बंटवारे जैसे इतने बड़े फैसले पर यूपी विधानसभा में कोई चर्चा नहीं हुई। सवाल यह उठता है कि यह मायावती या बसपा की खुद की जमीन का बंटवारा नहीं था, यह बंटवारा था प्रदेश की जनता के अपने उत्तर प्रदेश का। सदन में बहुमत होने का यह मतलब नहीं कि हर जगह आपकी ही मनमानी चलेगी।
संविधान के तहत किसी भी राज्य के विभाजन के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया जाना चाहिये, जबकि मायावती ने ऐसा कुछ नहीं किया। यह संविधान का मजाक नहीं तो क्या है कि देश का नक्शा बदल देने वाले प्रस्ताव को महज पांच मिनट में पास कर दिया जाता है।
दूसरा सवाल यह उठता है कि स्पीकर ने समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के लिए दिये गये नोटिस को संज्ञान में क्यों नहीं लिया? जबकि दोनों पार्टियों ने यह नोटिस राज्यपाल से मिलने के बाद दिया था। संविधान के तहत यदि कोई पार्टी सदन में किसी बात को लेकर पहले से लिखित नोटिस दे दे, तो स्पीकर का यह दायित्व बनता है कि वो उस पर कार्यवाही करे। लेकिन सोमवार को ऐसा कुछ नहीं हुआ। स्पीकर ने नोटिस को कूचरे के डिब्बे में डाल दिया।
हम आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी पिछले शीत कालीन सत्र में मायावती सरकार ने 30 से ज्यादा विधेयक महज पंद्रह मिनट में पास करा लिये थे। उन विधेयकों में 75 हजार करोड़ रुपए की योजनाओं को बिना चर्चा के पास करा लिया। वो भी ध्वनि मत से। यानी यूपी एक ऐसा राज्य बन गया है, जहां 2 मिनट में विधेयक पारित हो जाता है।
कुल मिलाकर देखा जाये तो मायावती का यह रवैया किसी तानाशाही से कम नहीं है। वैसे इसका दूसरा पक्ष देखें तो मायावती की यह चाल लोगों का ध्यान उन बातों से हटाने के लिए है, जो उनके वोटबैंक को कमजोर कर सकती हैं। वो बाते हैं- पूवी उत्तर प्रदेश में जापानी बुखार से लगातार मर रहे बच्चों का मामला, लगातार एक के बाद एक विधायक और सांसदों का आपराधिक गतिविधियों में शामिल होना, राज्य में बेहिसाब पैसा खर्च कर मूर्तियां लगवाना और पार्क बनवाना, एनएचआरएम घोटाला और दो सीएमओ व एक सीएमओ की हत्या, आदि।
मायावती ने बिल पास कर गेंद भले ही केंद्र के पाले में डाल दी हो, लेकिन असली गेंद (वोट) यूपी की जनता के हाथ में है। अब यह जनता का दायित्व बनता है कि ऐसी विषम परिस्थितियों में वो अपने कीमती वोट का इस्तेमाल सोच समझ कर करे।
सवाल आपसे- आज जो कुछ भी विधानसभा में हुआ क्या आप उससे सहमत हैं? अपने जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।












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