उत्तर प्रदेश: राज्य कर्मचारी हड़ताल पर

मांगों का निस्तारण करने की बजाय उन्हें आश्वासन ही दिया जाते रहे। इससे खफा होकर मंगलवार से प्रदेश भर के राज्य कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी। हड़ताल का असर यह रहा कि सरकारी काम-काज ठप रहा। वैसे कर्मचारी संघ का कहना है कि उन्होंने आवश्यक सेवाओं को हड़ताल से अलग रखा गया है। काम बंद हड़ताल का आह्वान अभी केवल कर्मचारी-शिक्षक समन्वय समिति ने किया है लेकिन राज्य के कई विभागों में हड़ताल का असर देखा गया। वहीं एक विशाल जनसभा का आयोजन करके सरकार को चेतावनी दी गई कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आवश्यक सेवाओं में हड़ताल में शामिल कर लिया जाएगा।
हड़ताल के कारण तमाम सरकारी डिपार्टमेंटों में कामकाज लगभग बंद रहा। तो राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के जनरल सेक्रेटरी पीसी कुरील ने बताया कि अगर उनकी मांगों पर सहानभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया तो यह तीन दिवसीय हड़ताल अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल सकती है। वहीं समिति के प्रवक्ता बीएल कुशवाहा ने बताया कि 11 अक्टूबर को चीफ सेक्रेटरी अनूप मिश्र की अध्यक्षता में हुई वार्ता में वेतन विसंगतियों को समाप्त करने के बारे में आश्वस्त किया गया था, लेकिन आज तक वादा पूरा नहीं किया गया।
राज्यकर्मियों के समर्थन में माध्यमिक शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, राज्य कर्मचारी महासंघ, डिप्लोमा इंजिनियर्स संघ, राज्य निगम कर्मचारी संघ सहित तमाम संगठन इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। हड़ताल पर आमादा कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जायेंगी, यह हड़ताल खत्म नहीं होगी।












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