केन्द्र पर दबाव बनाने के लिए प्रदेश का विभाजन: मायावती

मायावती ने कहा कि प्रदेश को चार भाग बुंदेलखंड, पूर्वाचल, पश्चिम प्रदेश और अवध प्रदेश में विभाजित करने का निर्णय काफी सोच-समझकर लिया गया है। उनका तर्क है कि यूपी काफी बड़ा राज्य है जिस कारण समुचित विकास नहीं हो पाता है उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह मानती है कि जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुये विकास को गति देने के वास्ते उत्तर प्रदेश को छोटे राज्य में पुनर्गठित किया जाना जरूरी है।
विपक्षियों द्वारा इसे चुनावी स्टंट बताने पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि बसपा इस मामले में केन्द्र सरकार के कई बार बात करने का प्रयास कर चुकी है बसपा सरकार ने केन्द्र सरकार को कई पत्र लिखकर अनुरोध किया लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला । उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र सरकार कोई सकारात्मक जवाब देती तो राज्य सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर राज्य के विभाजन का प्रस्ताव पारित करा देती। ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार पर दबाब बनाने के लिये बसपा सरकार ने गंभीरता से सोच विचार के बाद राज्य को चार हिस्सों में विभाजित करने का निर्णय लिया है।
मायावती ने कहा कि वर्ष 2007 में 9 अक्टूबर को बसपा ने लखनऊ में जनसभा कर पूर्वाचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गठन का प्रबल समर्थन किया गया था। इसके बाद 2007 में ही 31 अक्टूबर को राज्य सरकार ने विधानसभा में मत व्यक्त किया था कि संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत राज्यों के पुर्नगठन का अधिकार संसद को है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 मार्च 2008 को उन्होंनें प्रधानमंत्री मनमोहन ङ्क्षसह को पत्र लिखकर पूर्वाचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने के लिये संवैधानिक पहल करने का आग्रह किया था। केन्द्र की ओर से जवाब नहीं मिलने पर एक और 13 दिसम्बर 2009 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इसी सम्बन्ध में फिर पत्र लिखा गया।
दिसम्बर में भेजे गये दोनों पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया था कि वह राज्य विभाजन को लेकर अपनी स्वीकृति दें ताकि राज्य सरकार विधानमंडल में प्रस्ताव पारित कर भेज सके। उन्होंनें कहा कि पिछले चार साल से जारी प्रयास में सफलता नहीं मिलते देख राज्य सरकार ने अब केन्द्र सरकार पर दबाब बनाने के लिये मंत्रिमंडल में राज्य के चार हिस्से में विभाजन का प्रस्ताव पारित किया।












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