दिल्ली: कॉरपोरेट के हाथ में ऑटो-रिक्शा की कमान

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ऑटो रिक्शा की संख्या बढ़ाने के पीछे दलील दी है कि जितने दिनों में जनसंख्या दोगुना हुई है, उतने समय में वाहन 17.5 गुना बढ़े हैं। औसत स्पीड 16 किमी प्रति घंटा हो गई जबकि सेंट्रल दिल्ली में 10 किमी प्रतिघंटे तक पहुंच गई है। दिल्ली के 21 फीसदी हिस्से में सड़क है जिसका 90 फीसदी भाग निजी वाहन घेर रहे हैं जिसमें सिर्फ 35 फीसदी यात्री सफर करते हैं।
इतना ही नहीं ऑटो रिक्शा की संख्या नहीं बढ़ाए जाने और ऑटो चालकों के गलत व्यवहार से साइकिल रिक्शा की संख्या बढ़ी है। जिसका प्रति किमी खर्च 12-15 रुपये आता है। पिछले एक दशक में आबादी दोगुना हुआ है जबकि ऑटो रिक्शा में 30 फीसदी कम आई है। मांग के अनुरूप सिर्फ 10 फीसदी पूर्ति इन 55 हजार ऑटो रिक्शा से हो पाती है। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ऑटो की संख्या बढ़ाए जाने के साथ ही उनका अनुशासित होना बहुत जरूरी है। दुबई समेत कई ऐसे शहर हैं जहां ऑटो या टैक्सी का मीटर खराब होने की दशा में निशुल्क यात्रा करने का कानून है। उसी को आधार बनाकर ऑटो रिक्शा के नए परमिट जारी करने की नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। क्लस्टर बस और रेडियो टैक्सी की तर्ज पर सरकार ऑटो रिक्शा को एक कॉल सेंटर से बांधने की तैयारी में है।
ऑटो रिक्शा की संख्या बढ़ाने की सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति से एनसीआर में ऑटो रिक्शा का सफर आसान होगा। दिल्ली में ऑटो रिक्शा की 55 हजार से बढ़ाकर एक लाख किए जाने से बॉर्डर पर थमे पहिये के चलने की उम्मीद जाहिर की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी समेत चारों राज्यों के परिवहन अधिकारियों ने दिल्ली में ऑटो रिक्शा की संख्या पर लगी पाबंदी को हटवाने की बात दिल्ली सरकार से कही थी। अधिकारी भी कह रहे हैं कि एनसीआर में ऑटो आवागमन को मूर्त रूप दिया जा सकता है।
शहरी विकास मंत्रालय की अगुवाई में दिल्ली, यूपी, हरियाणा और राजस्थान के बीच कॉमन परिवहन समझौता हुआ था। उसमें यूपी के लिए 4000 ऑटो रिक्शा, हरियाणा के लिए एक हजार और राजस्थान के लिए 500 परमिट की बात कही गई थी। बस और टैक्सी को एनसीआर का आवागमन तो शुरू हो गया लेकिन ऑटो रिक्शा की सीमित संख्या को देखते हुए बात आगे नहीं बढ़ाई गई। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के पूर्व सदस्य सचिव डा. नूर मोहम्मद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऑटो रिक्शा की संख्या बढ़ाए जाने की स्वीकृति से लोगों का फायदा मिलेगा। एनसीआर में सुगम आवागमन का पहलू भी इसमें शामिल होना चाहिए।












Click it and Unblock the Notifications