मेरठ, पानीपत और अलवर अब दिल्ली के पास होंगे

आप दिल्ली से मेरठ की 90 किलोमीटर की दूरी मात्र 63 मिनट में, दिल्ली 109 किलोमीटर दूर पानीपत मात्र 61 मिनट में और दिल्ली 188 किलोमीटर दूर अलवर मात्र 117 मिनट में पहुंच जाएंगे। प्रस्तावित हाईस्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। मंत्रालय वर्ष 2016 तक 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाई जाने वाली ट्रेन की परियोजना का डीपीआर तैयार करने में जुट गया है।
शहरी विकास मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने एनसीआर प्लांनिग बोर्ड के साथ एक अहम बैठक में दिल्ली-अलवर, दिल्ली-पानीपत और दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर को मंजूरी प्रदान की है। तीनों कॉरिडोर को लेकर व्यवहार्यता अध्ययन रिपोर्ट प्लानिंग बोर्ड की ओर से मंत्रालय को सौंप दी गई है। यह परियोजना रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) के तहत विकसित की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि कमलनाथ ने इस परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर आने वाली लागत को देखते हुए प्लानिंग बोर्ड से तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया है। जिसमें पीपीपी मॉडल समेत निजी क्षेत्र के साथ सहयोग को लेकर अन्य विकल्प तलाशने की बात है।
गत जून में मंत्रालय ने इस संबंध में आरआरटीएस के लिए एनसीआर ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन के गठन को लेकर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया था। डीपीआर के बाद हाईस्पीड कॉरिडोर को गति मिल सकेगी। योजना के तहत 90 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर वर्ष 2016 तक 5.11 लाख यात्रियों की आवाजाही की संभावना है। वर्तमान में इस दूरी को तय करने में लगभग चार घंटे का समय लगता है। लेकिन कॉरिडोर के निर्माण होने से यह दूरी मात्र 63 मिनट में तय की जा सकेगी। साथ ही प्रदूषण के खतरे को कम किया जा सकेगा।
योजना के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन की तर्ज पर नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एनसीआरटीसी) का गठन होगा। पहले चरण के लिए चिह्नित दिल्ली-गाजियाबाद-मुरादनगर-मोदीनगर-मेरठ, दिल्ली-गुड़गांव-रेवाड़ी-अलवर और दिल्ली-कुंडली-मुरथल-गन्नौर-समालखा-पानीपत कॉरिडोर को लेकर मंत्रालय के स्तर पर फिलहाल व्यावहार्यता अध्ययन को अंजाम दिया जाएगा। लंबी दूरी को देखते हुए इसमें मेट्रो रेल के मुकाबले सवारियों के बैठने की क्षमता अधिक होगी।
किराया मेट्रो की तर्ज पर स्वचालित होगा। कॉरिडोर के सभी स्टेशन से परिवहन की अन्य प्रणालियों के बीच डीटीसी, मेट्रो और रेलवे से कनेक्टिविटी होगी। वर्ष 2007 में कराए गए सर्वेक्षण से यह बात सामने आई कि दिल्ली व इन शहरों के बीच प्रतिदिन लगभग 37 लाख लोग आवाजाही करते थे। आशा की जा रही है कि वर्ष 2032 तक यह आंकड़े 1.32 करोड़ तक पहुंच जाएंगे। हरियाणा के लिए खुशी की बात यह है कि राज्य से दो कॉरिडोर गुजरेंगे। अलवर तक कॉरिडोर गुड़गांव- मानेसर होते हुए जाएगा।
इससे दिल्ली से अलवर तक 188 किमी की दूरी मात्र 117 मिनट में पूरी हो सकेगी। दिल्ली-अलवर समर्पित कॉरिडोर से दिल्ली स्थित बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के अलावा गुड़गांव, मानेसर, धारूहेड़ा, भिवाड़ी, रेवाड़ी, बावल, शाहजहांपुर, खैरथल और अलवर की आबादी कवर की जाएगी। इस कॉरिडोर पर प्रतिदिन 7.43 लाख सवारियों के सफर करने का अनुमान है, जबकि 109 किलोमीटर पानीपत-दिल्ली की दूरी मात्र 61 मिनट में तय की जा सकेगी। जिस रफ्तार से लोगों की आवाजाही हो रही है उसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2016 तक दो लाख 77 हजार यात्री प्रतिदिन यात्रा करेंगे। सरकार की यह योजना परवान चढ़ने से दिल्ली पर आबाद का भार कम हो जाएगा। मेरठ, अलवर जैसे शहरों का कायाकल्प हो जाएगा।












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