यूपी के बंटवारे पर मायावती का समर्थन करेगी कांग्रेस

Uttar Pradesh Chief Minister Mayawati
दिल्ली (ब्यूरो)। विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही राज्य की दो प्रमुख पार्टियों ने बंटवारे की सियासत शुरू कर दी है। हालांकि कुछ पार्टियों ने इसका विरोध किया है पर बसपा सुप्रीमो और मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है है वह राज्य के बंटवारे के लिए तैयार है। वैसे उन्होंने इसका स्वरूप कोई नहीं बताया है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने भी यूपी के बंटवारे को अपनी सहमति दे ही है। क्योंकि कांग्रेस का मानना है कि इससे बसपा को फायदा मिल सकता है पर वह केवल बसपा के लिए नहीं छोड़ सकती। इसलिए मुख्यमंत्री मायावती के सियासी ट्रंप कार्ड को फेल करने की तैयारियों में जुट गई है।

कांग्रेस महासचिव एवं राज्य के प्रभारी दिग्विजय सिंह ने कहा कि मायावती सरकार अगर उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटने का प्रस्ताव विधानसभा में ला रही है, तो कांग्रेस भी चाहती है कि बुंदेलखंड जैसे राज्य बनें। दरअसल, कांग्रेस इस मुद्दे पर मायावती की सक्रियता देखकर हरकत में आई है। मुख्यमंत्री मायावती ने 21 नवंबर से लेखानुदान लाने के नाम पर विधानसभा का सत्र बुलाया है। इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि सरकार उत्तर प्रदेश को पूर्वी, मध्य, पश्चिम और बुंदेलखंड में बांटने का प्रस्ताव ला सकती है।

चुनाव से ठीक पहले बसपा के इस तरह के प्रस्ताव के सियासी मायने स्पष्ट हैं। कांग्रेस इस मामले में मायावती को बढ़त नहीं लेने देना चाहती। सूत्रों के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हरित प्रदेश बनाने की पैरवी करते रहे राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह से भी कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की बातचीत हुई है। अजित सिंह का तो यह पुराना मुद्दा ही रहा है और वह इसका फायदा किसी भी कीमत में बसपा के खाते में नहीं जाने देना चाहते। कांग्रेस-रालोद गठबंधन लगभग तय ही हो चुका है। अजित सिंह राज्य के पुनर्गठन की मांग कर रहे हैं, जिसका कांग्रेस ने भी सियासी हवा देखते हुए समर्थन कर दिया है।

दिग्विजय सिंह ने उत्तर प्रदेश के सियासी बंटवारे के संकेत देते हुए कहा, 'हम हमेशा से छोटे राज्यों के समर्थन में हैं, लेकिन इस पर सियासत नहीं होनी चाहिए। हमारा केंद्र सरकार से अनुरोध है कि सही बंटवारे के लिए द्वितीय राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया जाए। इस बारे में उत्तार प्रदेश विधानसभा में प्रस्ताव आने पर हम अपने प्रदेश के नेताओं से बात कर फैसला करेंगे।' सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व शीर्ष स्तर पर मायावती का प्रस्ताव आने पर समर्थन का मन बना चुका है। कांग्रेस का समर्थन इसलिए भी अहम है, क्योंकि मायावती के लिए यह प्रस्ताव विधानसभा में प्रचंड बहुमत यानी दो तिहाई मतों से पारित कराना कांग्रेस के बिना संभव नहीं होगा।

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