अमर सिंह, सभा करके करेंगे राज्‍य के गठन की मांग

amar singh
नयी दिल्ली। राज्यसभा सदस्य अमर सिंह ने आज कहा कि अपने गुर्दो के इलाज के लिये सिंगापुर जाने से पहले वह उत्तर प्रदेश के सारनाथ में अपने समर्थकों के लिये एक सभा करेंगे और मुख्यमंत्री मायावती से पूर्वांचल, पश्चिमांचल तथा बुंदेलखंड के गठन के लिये कदम उठाने की मांग करेंगे। लेकिन पूर्वांचल हमेशा उपेक्षा का शिकार रहता है।

वर्ष 2008 में नोट के बदले वोट मामले में अदालत से जमानत मिलने के बाद पहली बार संवाददाताओं को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि 14 नवंबर को मैंने सारनाथ जाने का फैसला इसलिये किया है क्योंकि हाल ही में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने गौतम बुद्ध नगर में अपने माता पिता की, स्वयं की, गौतम बुद्ध की और कई गजराजों की प्रतिमों का अनवरण करते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश के विकास के लिये राज्य का विभाजन अपरिहार्य है।

उन्होंने कहा कि चूंकि मायावती ने गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष यह बात कही थी, इसलिये मैं बुद्ध की एक और पवित्र नगरी वाराणसी के निकट स्थित सारनाथ जाकर पूर्वांचल, पश्चिमांचल और बुदेलखंड की मांग उठाना चाहता हूं। सिंह ने कहा कि यह बात सभी जानते हैं कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा बहुमत में है। मायावती ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर महज औपचारिकता निभायी है। मौजूदा राजनीतिक हालात के मद्देनजर यह निश्चित नहीं है कि चुनाव के बाद क्या किसी दल को बहुमत मिलेगा।

मायावती को उत्तर प्रदेश कैबिनेट में राज्य के विभाजन का प्रस्ताव पारित कराना चाहिये और विधानसभा के दो दिवसीय शीतकालीन सत्र में इस प्रस्ताव को दो-तिहाई बहुमत से मंजूर करना चाहिये। राज्यसभा सदस्य ने कहा कि मैं सारनाथ जाकर अपने समर्थकों के बीच यह मांग करूंगा कि हमें पत्र नहीं प्रस्ताव चाहिये, पूवाचल का राज्य चाहिये।

सपा के पूर्व नेता ने कहा कि जब मुलायम सिंह की सरकार बनती है तो उनके गांव में बिजली रहती और जब मायावती की सरकार आती है तो उनके गांव में बिजली पहुंच जाती है। राज्य में होने वाले बिजली उत्पादन में पूर्वांचल की हिस्सेदारी 80 फीसदी है लेकिन फिर भी वह बिजली से महरूम रहता है। पूर्वांचल से 148 विधायक और 28 सांसद हैं लेकिन उसे सिर्फ 56 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट मिलता है। सिंह ने कहा कि भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी गंगा को निर्मल करने की बात करते हैं, लेकिन गंगा का पानी पीने वालों का जीवन कब निर्मल होगा।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मुलाकात करने के लिये उन्होंने कई बार मायावती से समय मांगा लेकिन उन्होंने मिलने का वक्त नहीं दिया। राइट टू रिकाल के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इससे अस्थिरता आयेगी लेकिन जनता अगर अपने प्रतिनिधियों से नाराज से है तो उसे उन्हें बदल देना चाहिये। सिंह ने कहा कि उदाहरण के लिये अगर मैं बुरा हूं और फिर भी 18 साल से संसद सदस्य हूं तो इसमें गलती आम आदमी की है। जनता को रोज अवसर नहीं मिलते लेकिन जब अवसर मिलता है तो उसे उसका पूरा फायदा उठाना चाहिये।

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