नोएडा एक्सटेंशन: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे किसान

किसान नेता दुष्यंत नागर का कहना है कि इसके लिए हमलोगों की जल्द ही एक पंचायत होने जा रही है जिसमें हम लोग आगे कि रणनीति पर विचार करेंगे। सूत्रों ने बताया कि इन किसान नेताओं ने 25 अक्टूबर को एक महा पंचायत बुलाई है जिसमें संबंधित मुद्दों को रखा जाएगा और उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में जाने और फैसले को मानने पर विचार होगा। लेकिन सूत्रों का कहना है कि किसान इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा अवश्य खटखटाएंगे।
आपको बता दें कि आज सुबह इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन पर अपना फैसला सुनाया जिसमें उसने एक बीच का रास्ता निकालते हुए सभी को मसलन किसानों, बिल्डरों, निवेशकों और नोएडा अथारिटी के लोगों को खुश करने की कोशिश की गई। इसे दीवाली का तोहफा माना जा रहा है। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी को भी इस फैसले पर आपत्ति हो तो वह 90 दिन के भीतर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है उसके अनुसार, कोर्ट ने तीन गांवों के अधिग्रहण को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। जिसमें असदुल्लापुर, देवला, चक शाहबेरी गांव शामिल है। कोर्ट का कहना था कि इन गांवों में अभी तक कोई कार्य नहीं हो रहा था। वहीं हाईकोर्ट ने अपने फैसले में किसानो को दी जाने वाली विकसित भूमि को भी बढा दिया है। अब किसानों को 10 फीसदी विकसित भूमि दी जाएगी। यानी किसान पहले से 25 फीसदी भूमि ज्यादा पा सकेंगे। पहले यह छह फीसदी था पर नोएडा अथारिटी ने कुछ दिनों ही पहले इसे बढ़ाकर 8 फीसदी कर दिया था।
साथ ही कोर्ट ने किसानों को मिलने वाले मुआवजे में भी संशोधन किया है। अब 60 गावों के किसानों को 64 फीसदी राशि बतौर मुआवजा ज्यादा मिलेगा। गौरतलब है कि नोएडा एक्सटेंशन समेत ग्रेटर नोएडा के 40 गांवों के किसानों ने 491 याचिकाएं कोर्ट में डाल रखी थी। नोएडा के भी 24 गांवों के किसानों ने याचिकाएं दायर की थी। जमीन अधिग्रहण का मामला कोर्ट में जाने से नोएडा एक्सटेंशन का विकास कार्य ठप हो गया था। फ्लैटों की बुकिंग बंद हो गई।
अकेले नोएडा एक्सटेंशन में सवा लाख लोगों ने फ्लैट बुक कर रखे थे, उनके मकान का सपना अधर में था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब उनके घर का सपना हकीकत में बदलने वाला है। आप बता दें कि भूमि अधिग्रहण के मामले पर हाईकोर्ट में तीन सदस्यीय पीठ लगातार सुनवाई कर रही थी। पिछले महीने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसले को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया था।












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