कैश फॉर वोट के मास्टरमाइंड हैं मुलायम सिंह, बुरे फंसे अमर सिंह

लेकिन इस पूरे खेल के पीछे असली दिमाग तो सपा सु्प्रीमो मुलायम सिंह यादव का है और वो अपने आप को इस घोटाले से बचाने चाहते थे इसलिए उन्होंने अमर सिंह का साथ छोड़ दिया। ये कहना ना तो सीबीआई का है और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का। बल्कि ये कहना है फेसबुक पर कुछ बुद्धिजीवियों का।
फेसबुक के एक सदस्य जिनका रीतेश अग्रवाल है और जो कि एक सरकारी कर्मचारी हैं ने लिखा है कि 'आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसे मुलायम सिंह को अपने ऊपर सीबीआई केस चलने का डर था जिसके चलते वो कांग्रेस का साथ दे रहे थे और उन्होंने ही नेताओं को खरीदा है, चूंकि अमर सिंह के पास पैसा था ।
इसलिए उन्होंने अमर सिंह का इस्तेमाल किया। लेकिन जब अमर सिंह फंसने लगे तो उन्होंने उनका साथ छोड़ दिया। ये वाकई में एक शर्मनाक हरकत है। जब अमर सिंह को उनकी जरूरत थी तो वो उन्हें साथ-साथ लेकर घूमते थे लेकिन जब मतलब निकल गया तो उन्होंने अमर सिंह को दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंका।'
ऐसी ही प्रतिक्रिया कुछ विश्वविद्यालय के छात्रों ने दी है जिनका कहना है कि अमर सिंह के बाद रेवती रमण सिंह को भी निशाने में लाया जा रहा है। देखना बहुत जल्द मुलायम सिंह उनसे भी किराना कर लेगें।
गौरतलब है कि मंगलवार को तीसहजारी कोर्ट ने सपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रेवती रमण को आरोपी बनाया है।और 3 नवंबर को रेवती रमण को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। रेवती रमण सिंह पर भाजपा सांसदों से मिलने का आरोप लगा है और कहा जा रहा है कि 22 जुलाई 2008 को विश्वास मत पर मतदान के दौरान रेवती रमण सिंह लागातार भाजपा सांसदों के संपर्क में रहे थे।









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