यूपी के ऊर्जा मंत्री ने भाजपा नेता को भेजा कोर्ट का नोटिस

ऊर्जा मंत्री के वकील द्विवेदी ने कहा कि बिजली खरीद के मामले में जो भी किया गया है वह कारपोरेशन स्तर पर किया गया क्योंकि खरीद फरोख्त का निर्णय निदेशक मण्डल लेता है। हालांकि द्विवेदी सीधे तौर पर कारपोरेशन अध्यक्ष नवनीत सहगल का नाम लेने से कतराते रहे लेकिन नोटिस में कहा गया कि बिजली खरीद के लिए किए जाने वाले प्रत्येक अनुबंधके निदेशक मण्डल व अध्यक्ष कारपोरेशन ही अधिकृत हैं ऐसे ऊर्जा मंत्री का नाम कहीं से भी नहीं आना चाहिए था फिर भी उनका नाम घोटाले में लिया गया।
उपाध्याय का कहना है कि भाजपा जिस प्रकार उनके नाम को घोटाले में खींच रही है उससे उनकी छवि खराब हो रही है। नोटिस में कहा गया कि भाजपा जैसी पार्टी तथ्यों की जानकारी के आभाव में इस प्रकार का कार्य करी है जो उसे शोभा नहीं देता है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त से की गयी शिकायत में आधारहीन बातें कहीं गयी हैं इस कार्य से ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा ऊर्जा मंत्री व बसपा की छवि को धूमिल करने के लिए इस प्रकार का भ्रामक प्रचार कर रही है। उनका कहना है कि राज्य में चुनाव नजदीक है ऐसे में भाजपा मंत्रियों आदि के खिलाफ इस प्रकार के प्रचार कर पार्टी की बदनामी करना चाहती है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वर्ष 1997 में भाजपा व बसपा की संयुक्त सरकार थी लेकिन बसपा के समर्थन वापसी के बाद सरकार गिर गयी तो भाजपा ने उन्हें अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का निमंत्रण दिया था लेकिन उन्होंने बसपा नहीं छोड़ी। इसी कारण भाजपा उनके खिलाफ षणयंत्र कर रही है। भाजपा ने जानबूझकर अपनी राजनैतिक दुश्मनी निकालने के लिए रामवीर उपाध्याय के नाम घोटाले में लिया है।
ज्ञात हो कि ऊर्जा मंत्री के वकील मनोज कुमार द्विवेदी बंद शब्दों में घोटाले के लिए शक्ति भवन प्रबंधन को दोषी बताए गये। उन्होंने कहा कि खरीद फरोख्त का सारा कार्य पावर कारपोरेशन के निदेशक मण्डल स्तर पर होता है। उनके इस जवाब से साबित होता है कि बिजली खरीद के जिस घोटाले की बात भाजपा द्वारा कही गयी वह यूपीपीसीएल चेयरमैन नवनीत सहगल व अन्य निदेशकों के स्तर पर किया गया।












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