अन्ना हजारे को समर्थन पर सपा में विरोध

Akhilesh Yadav
लखनऊ। चुनाव नजदीक है लेकिन समाजवादी पार्टी के नेताओं के सुर आपस में नहीं मिल पा रहे हैं। हाल ही में समाजसेवी अन्ना हजारे को समर्थन के मुद्दे पर सपा नेताओं के विरोधाभासी बयान यह जाहिर कर रहे हैं कि नेताओं में एकराय नहीं है।

जनलोकपाल विधेयक के संसद के पारित नहीं होने की दशा में अन्ना ने एलान किया है कि वह प्रदेश चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करेंगे। अन्ना की इस मुहिम को समर्थन देने में सपा के कुछ नेता तो खुलकर सामने आये वहीं कुछ नेताओं ने अन्ना के खिलाफ ही बयानबाजी शुरू कर दी। सपा के वरिष्ठi नेता शिवपाल यादव ने अन्ना को महान समाजसेवी बताते हुए उन्हें समर्थन देने का एलान किया। वहीं पार्टी के लिए अन्य वरिष्ठ नेता आजम खां ने उन्हें राष्‍ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बताया और उनकी आलोचना करने से भी पीछे नहीं हटे।

सपा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अन्ना का समर्थन किया था। शिवपाल व अखिलेश यादव ने कहा था कि पार्टी हमेशा से भ्रष्टाचार के खिलाफ रही है और राज्य में इसके लिये लड़ाई भी लड़ रही है। सपा ने इन नेताओं ने अन्‍ना हजारे को भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम में आमंत्रण भी दिया था, लेकिन सपा के केन्द्रीय नेतृत्व के बयान इससे उलट हैं। पार्टी प्रवक्ता व सांसद मोहन सिंह ने अन्ना हजारे की नीयत पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

उन्होंने कहा है लगता है कि हजारे की राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढ़ गयी है। दिल्ली की तिहाड जेल और रामलीला मैदान में 16 अगस्त से हजारे के तेरह दिन तक चले अनशन में सिटीजन चार्टर समेत तीन मांगों पर संसद में हुई चर्चा में भी सपा के रेवती रमण सिंह ने समाजसेवी अन्ना हजारे की आलोचना की थी और कहा था कि वह अपनी मांग किसी की गर्दन पर तलवार लटका कर मनवाना चाहते हैं। बहरहालक की प्रदेश इकाई और केन्द्रीय नेतृत्व में कोई तालमेल दिखायी नहीं देता है।

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