कांग्रेसियों ने कहा ‘थैंक्यू अन्ना'
हिसार। हिसार लोकसभा उपचुनाव में तीन दिन शेष रह गए हैं। जीत के लिए सभी दलों ने ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। चुनाव की अब तक जो तस्वीर उभर कर आई है उसके आधार पर लग रहा है कि मुख्य मुकाबला हजकां-भाजपा प्रत्याशी कुलदीप बिश्रोई व इनेलो प्रत्याशी अजय सिंह चौटाला के बीच हो सकता है। कांग्रेस यहां तीसरे नंबर पर दिख रही है जिसे लेकर कांग्रेसी खेमे में चिंता थी। उपचुनाव जीताने के लिए 10 जनपथ से जिन नेताओं के कंधों पर जिम्मेदारी डाली गई थी उनके चेहरों से रौनक गायब थी। उन्हें लग रहा था कि यदि कांग्रेस प्रत्याशी उपचुनाव में हार जाता है तो वे दिल्ली दरबार में क्या मुंह लेकर जाएंगे, मगर अब ऐसा नहीं है।
कांग्रेसियों की चिंता को अन्ना हजारे की कांग्रेस विरोधी मुहिम ने एक झटके में दूर कर दिया है। कांग्रेसी मन ही मन अन्ना व उनकी टीम को धन्यवाद कह रहे हैं। अब उनके पास उपचुनाव में हार होने की स्थिति में 'मजबूत बहाना' मिल गया है। यदि कांग्रेस को उपचुनाव में हार नसीब होती है तो यह कहा जाएगा कि अन्ना हजारे ने कांग्रेस का विरोध किया था, इसलिए हार मिली है। यानि हार की ठिकरा अन्ना हजारे के सिर फोडऩे का अच्छा बहाना मिल गया है।
इसी बहाने के कारण कांग्रेसियों के चेहरों पर कोई चिंता नहीं है। टीम अन्ना के मुख्य सिपाही अरविंद केजरीवाल लगातार हिसार संसदीय क्षेत्र में लोगों से मिल रहे हैं। वे कांग्रेस के खिलाफ मतदान की अपील कर रहे हैं। अब यह तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा कि हिसार उपचुनाव में अन्ना फेक्टर काम करेगा या नहीं मगर इतना जरूर कहा जा सकता है कि इस मुहिम से कांग्रेस कमजोर अवश्य हुई है।
इस बात को दबी जुबां से कांग्रेसी भी मान रहे हैं। वैसे देखा जाए तो जब से मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हिसार संसदीय क्षेत्र का दौरा किया है तथा दूसरे दलों के नेताओं को कांग्रेस में शामिल किया जा रहा है उससे जयप्रकाश तिकोने मुकाबले में आ गए हैं। आज वैसे हालात नही हैं जो एक सप्ताह पहले थे। इस स्थिति में बदलाव आया है।
इसका कारण है कि मुख्यमंत्री के नाम पर लगभग सभी कांग्रेसी एकजुट नजर आ रहे हैं और जीत के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस की ओर से विकास को मुद्दा बनाया गया है। ऐसे हालात में यह कहना कि कांग्रेस की हार निश्चित है, जल्दबाजी होगी। अब ऊंट किसी कोई भी करवट बदल सकता है, फिर भी प्रदेश कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं के लिए अन्ना की मुहिम सुकून देने वाली लग रही है।












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