2जी स्पेक्ट्रम, कोर्ट, घोटाला, सीबीआई

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में 2जी मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जहां टाटा और वीडियोकॉन समूह को पाक साफ घोषित कर लिया वहीं रिलायंस कम्युनिकेशन के मामले में कहा कि वह यह पता लगाने के लिए आगे जांच करेगी कि असल में फायदा किसे पहुंचा। हालांकि अनिल धीरू भाई अंबानी समूह से जुड़े तीनों अधिकारियों ने जांच के दौरान इस फैसले में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली थी, लेकिन हाई कोर्ट में बेल की अर्जी पर सुनवाई के दौरान वे बयान से मुकर गए।
सीबीआई ने यह दलील गैर सरकारी संगठन सीपीआईएल के वकील प्रशांत भूषण के इस आरोप के जवाब में दी कि सीबीआई 2जी मामले की ठीक से जांच नहीं कर रही। सीपीआईएल ने सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई जांच की निगरानी के लिए 2-3 सदस्यीय निगरानी पैनल गठित करने का अनुरोध किया है। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और एके गांगुली की पीठ के समक्ष सीबीआई के वकील केके वेणुगोपाल ने रिलायंस कम्युनिकेशन के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ जांच न करने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि स्वान टेलीकाम के 9.9 फीसदी शेयर डेलफी को बेचने के मामले में जांच चल रही है।
आपको बता दें कि इसी डेलफी के बारे में पता करने के लिए सीबीआई की टीम मारीशस भी गई थी। हालांकि उसे बहुत कुछ हाथ नहीं लगा है पर यदि रिलायंस के तीनों अधिकारियों ने सरकारी गवाह बनने की ठान ली तो अंबानी को जेल की हवा खानी पड़ सकती है।












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