मायावती की आरक्षण की मांग चुनावी चाल : विपक्ष

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में कहा है कि अभावग्रस्त व दयनीय जीवन जी रहे सवर्ण जातियों के गरीब लोगों के उत्थान एवं उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोडऩे की आवश्यकता है। उन्होंने इस वर्ग को आरक्षण देना जरूरी बताया है। इसी तरह मायावती ने मुसलमानों को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग को लेकर कल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र भेजा था।
भाजपा व सपा सहित स पूर्ण विपक्ष ने मायावती की इस मांग को चुनावी शिगूफा करार दिया है। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव नजदीक है इसलिए मायावती ऐसी बयानबाजी कर रही हैं। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री मायावती द्वारा मुस्लिमों को आबादी के अनुरूप आरक्षण की मांग करना दर्शाता है कि प्रदेश सरकार अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी पराजय को लेकर किस कदर भयभीत है।
उन्होंने मायावती की आरक्षण की मांग का विरोध करते हुए कहा है कि धर्म आधारित आरक्षण संविधान विरोधी है तथा इस प्रकार की मांग अलगाववादी शक्तियों को बढ़ावा देती है। वोटों के लालच में संविधान विरोधी मांग है। समाजवादी पार्टी ने मायावती की मांग को ढोंग व छलावा बताया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार होने पर भी उसने मुसलमानों के सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए कुछ भी नहीं किया।
बसपा सरकार के लगभग साढ़े चार वर्ष में मायावती को न तो मुसलमानों की और न ही सच्चर कमेटी की याद आई। श्री यादव ने दावा किया कि हाल में ही 33 हजार सिपाहियों की भर्ती में बसपा सरकार ने सिर्फ 650 मुस्लिम सिपाही भर्ती किये जो कि कुल भर्ती का 2 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा कि मायावती के मुसलमानों को सिर्फ धोखा ही दिया है।












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