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सीवीसी ने कारपोरेट को भी लोकपाल के दायरे में लाने की सिफारिश की

CVC recommends to bring corporates under Lokpal Bill
नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के अनशन से घबराई सरकार अभी तक उबर नहीं पाई है। अब तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के नुमाइंदे कारपोरेट और मीडिया को जनलोकपाल बिल के दायरे में लाने की वकालत कर रहे थे पर अब केंद्रीय सतर्कता आयोग के प्रमुख प्रदीप कुमार ने भी कोरपोरेट को जनलोकपाल बिल के अंतर्गत लाने की मांग करके एक बार फिर इस मुद्दे को हवा दे दी है।

सूत्रों ने कहा कि उनकी मांग है कि जिस प्रकार से लोकपाल के दायरे में उच्च स्तर की नौकरशाही और राजनीतिक लोगों को लाने की बात हो रही है यह ठीक है पर इसमें रिश्वत देने वाले लोगों को भी शामिल करने की जरूरत है। उन्होंने इस मामले में अमेरिका एक कानून का उदाहरण दिया है जिसके अनुसार रिश्वत देना भी गैर कानूनी कार्य माना जाता है। सीवीसी आयुक्त प्रदीप कुमार ने कहा कि सीवीसी के पास निजी क्षेत्रों की कंपनियों में होने वाले भ्रष्टाचार की जांच करने का अधिकार नहीं है। हालांकि आयोग ने सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के भ्रष्टाचार संबंधी मामले सीबीआई को भेजे हैं। उन्होंने कहा कि लोकपाल को मंत्रियों के खिलाफ जांच करने और कानून के मुताबिक उनके खिलाफ कदम उठाने का अधिकार होना चाहिए।

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