भूकंप से सिक्किम में भूस्खलन, बिजली गुल, फोन ठप और बचाव कार्य में मुश्किल
गंगटोक।
पूर्वी व उत्तरी भारत में आए भूकंप ने सिक्किम में सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। तेज भूकंप के बाद वहां भूस्खन हुआ है। सड़कें धंस गई हैं। बचाव कार्य में लगी सेना को मौके पर पहुंचने में मुश्किल हो रही है। सरकार ने यहां बचाव कार्य के लिए वायु सेना के 4 विमान भेज दिए हैं। जो सिक्किम की राजधानी गंगटोक पहुंच गई हैं। भूकंप की वजह से कई इमारतें गिर गई हैं। जिनके नीचे बहुत से लोगों के दबे होने की खबर है। गृह सचिव एके सेठ ने बताया है कि भूकंप की वजह से सिक्किम में अभी तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 33 लोग घायल हुए हैं। बिहार में भी भूकंप से 2 लोगों की मौत हुई है। वहीं पड़ोसी देश नेपाल में भी 9 लोगों की मौत हुई है। id="toptextpromo">आईटीबीपी
का मुख्यालय सिक्किम की राजधानी गैंगटोक में है। जिसके 400 जवान राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं। आईटीबीपी के जवानो ने सिक्किम के टेगॉन्ग से लगभग 200 लोगों को बचाया है। इस इलाके में सैलानियों के भी फंसे होने की खबर थी जिन्हें जवानों ने बचाया है। मिली जानकारी के मुताबिक भूकंप की वजह से गैंगटोक की बिजली और फोन व्यवस्था ठप हो गई है। पूरे इलाके में अंधेरा छाया हुआ है। इलाके में कई जगहों पर मिट्टी धस गई है। इमारतों में दरारें आई हैं। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>इस
भूकंप का ज्यादा नुकसान पहाड़ी बेल्ट में ही देखने को मिला है। वैसे तो इस भूकंप के झटके दिल्ली से लेकर नेपाल तक महसूस किए गए लेकिन जान माल का नुकसान सबसे ज्यादा सिक्किम और नेपाल में ही हुआ। सिक्किम के कई इलाकों में राहत और बचाव दल इसलिए नहीं पहुंच पा रहे हैं क्योंकि ज्यादातर सड़कें धंस चुकी हैं। अभी संभावन है कि इस भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। गौरतलब है कि यह भूकंप सिक्किम, असम, पश्चिम बंगाल के अलावा उत्तर भारत के दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और झारखंड में आया था। जिसकी तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 6.8 थी। इसका केंद्र सिक्किम और नेपाल की सीमा थी।











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