लाइव अपडेट: मोदी के उपवास में तमाम मुसलमान भी शामिल

10:28 से 11:08 बजे तकमोदी का संबोधन- 2001 में जब गुजरात में भूकंप आया तो लोगों ने कहा सब बर्बाद हो गया। फिर 2002 में गुजरात में गोधरा कांड के बाद दंगे हुए। इसके बाद लोगों ने हमें कोसना शुरू कर दिया। लोगों ने हमारे ऊपर तमाम आरोप लगाये और कीचड़ उछालने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन हमने हार नहीं मानीं। हम हम सबको जोड़ते हुए, सबकी भलाई और सुख के लिए विकास की नई-नई ऊंचाईयों को पार करते गये।
अक्षरधाम पर जब आतंकी हमला हुआ तो लोगों ने कहा कि गुजरात एक बार फिर आग की लपटों में झुलस जायेगा, लेकिन उसके बावजूद राज्य ने शांति, सद्भावना का परिचय दिया। लेकिन यह सच्चाई किसी को नजर नहीं आयी, क्योंकि उन्होंने अपने हाथ में पत्थर ले रखे थे। जब क वे पत्थर मारने का काम करते रहे, तब तक उन्हें कुछ नहीं दिखाई दिया।
2008 में एक के बाद एक धमाकों में फिर लगा कि गुजरात पीछे चला जायेगा, लेकिन फिर भी हम अडिग नहीं हुए। छह करोड़ गुजरातियों ने संयम बरता और उसी के बल पर आगे बढ़ते गये। जो लोग गुजरात से भलिभांति परिचित हैं उन्हें पता है कि हम कहां जा रहे हैं। एक समय था जब सूराज ढलने से पहले लोग घरों में घुस जाते थे। हो हुल्लड़, आये दिन सांप्रदायिक हिंसा, यहां बच्चा पैदा होता था तो बच्चा मां-बाप को बाद में कर्फ्यू पहले देखता था। आज 10 साल बीत गये हैं, कर्फ्यू का नामोनिशान नहीं हैं।
गरीब की रोजीरोटी को कोई खतरा नहीं। गुजरात में हर कोई सुख से जी रहा है। गुजरात ने शांति की ताकत को पहचाना है। उनका विश्वास बढ़ गया है कि अगर हम मिलजुल कर आगे बढ़ेंगे तो सबका भला होगा। मैं तो दुनिया के सामने गर्व के साथ कहता था कि हमें आगे बढ़ना है। गुजरात जैसा राज्य इतनी प्रगति करे, कि देश के किसी कोने में अगर कोई राज्य पीछे रह गया है, तो हम उसे मदद दे सकें। हम देश की सेवा करना चाहते हैं हम देश की मदद करना चाहते हैं। गुजरात की मिट्टी में इतनी ताकत है, कि कोई क्षेत्र ऐसा नहीं होगा जहां गुजरात का प्रभाव नहीं हो।
हमें लोगों ने सैंकड़ों पत्थर मारे। मेरा सीना ऐसे पत्थर झेलने के लिए मजबूत हो चुका है। मैंने उन्हीं पत्थरों से अपनी सीढि़यां बनायीं और आगे बढ़े। आज जैसे दुनिया गुजरात की गवर्नेन्स की चर्चा कर रही है, वो दिन दूर नहीं है, जब दुनिया को गुजरात के उस मॉडल की चर्चा करनी पड़ेगी, जिसमें शांति, एकता और भाईचारे के साथ विकास के पथ पर चला जाता है।
एक बड़ा सपना है कि हमारे देश में कौमी एकता के कार्यक्रम होते रहते हैं, सरकार उस पर खूब पैसा खर्च करती है। कौमी एकता के पकौड़े बनाये जाते हैं और खत्म हो जाते हैं। लेकिन हमारा यह सद्भावना मिशन देश के गांव-गांव तक जायेगा। हम लोगों को बता देंगे कि हम सबकी भलाई के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। मेरा तीन दिन का उपवास किसी के खिलाफ नहीं। मैं चाहता भी नहीं हूं कि कोई किसी के खिलाफ इस मंच में कुछ कहे।
मेरे दिल में संवेदना तब भी थी, संवेदना आज भी है। यही पीड़ा आज भी है, जो छह करोड़ गुजरातियों के लिए मुझे दिन रात दौड़ने व काम करने की प्रेरणा देती है। हम जहां हैं वही से जो कर रहे हैं। हमने भारत मां की सर्वाधिक सेवा की है और करते रहेंगे। हमारा एक मंत्र है- भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास। अगर गुजरात के लोग दस कदम चलें, तो देश 300 कदम आगे बढ़े। अगर हम 150 कदम चलें तो देश 1500 कदम आगे बढ़े।
हम किसी को पीछे नहीं रहने देना चाहते। अगर हम आगे निकल जायेगे तो हम रुक कर इंतजार करेंगे। हम सद्भावना के साथ हर काम करते हैं। मानवता ही हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा है। विकास हमारा मंत्र है और उसी मंत्र को लेकर हम आगे बढ़ना चहाते हैं। गुजरात को किसी के उपदेश की आवश्यकता नहीं।
हम दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि संकटों से निकलकर हम किस तरह आगे बढ़े हैं। आज हम जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, वहां रुकना हमें मंजूर नहीं। विकास की यात्रा को हम रुकने नहीं देंगे। मैं सद्भावना के लिए अनशन पर बैठा हूं। मेरी शिक्षा-दीक्षा जो हुई है, जिन संस्कारों में पला-बढ़ा, उस कारण मैंने कभी अपना जन्मदिन नहीं मनाया। जब से लोगों को पता चला कि आज मेरा जन्मदिन होता है, तब से लोग मुझसे कहते थे, कि आप क्यों नहीं मनाते।
मेरे मन में किसी के प्रति कोई कटुता नहीं। हम लोकतंत्र पर विश्वास करते हैं। मैं कटुता, द्वेश, बदला लोकतंत्र के हिस्से नहीं होते। लोकतंत्र की सबसे पहली शर्त सबको साथ रखने की होती है। 120 करोड़ का देश एक हो, हम यही चाहते हैं। यह सरा प्रयास प्रेम का माहौल आगे बढ़ाने के लिये है। गुजरात एक शक्ति बनकर देश के काम आये। सिर्फ यही प्रयास है हमारा।
आज सभी वरिष्ठ लोग मुझे आशीर्वाद देने आये हैं, मैं उनका आभारी हूं। मैं देश को विशवास दिलाना चाहता हूं, कि हम मानवता के मानकों पर नीचे नहीं गिरना चाहते। मैं सबको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि छह करोड़ गुजराती मेरा परिवार है। उनका सुख मेरा सुख, उनका दु:ख मेरा दु:ख। छह करोड़ गुजरातियों के सपने मेरे सपने, उनकी आकाक्षा मेरी आकांक्षा। मैं इसके लिए जिंदगी खपाने के लिए तैयार हूं। पल-पल जनता को समर्पित है। शरीर का कण-कण और आत्मा का अधिकार उन्हें समर्पित है। मैं आपका हूं, मुझे आशीर्वाद दें कि मैं दुनिया को दिखा सकूं, कि सबका विकास किसी बात का जवाब सबको जोड़कर दिया जाता है।
मैं ईश्वर से आज कुछ मांग रहा हूं- वो मुझे शक्ति दे, ताकि मैं सद्भावना के माहौल के लिए अपने जीवन को खपा दूं। आप मुझे शक्ति दें कि मेरे गुजरात के हर इलाके में सुख और शांति का माहौल बने। ताकि किसी के प्रति हमारे मन में किसी के प्रति दुर्भावना नहीं हो। हम स्वस्थ्य समाज की संरचना के पूरक बनना चाहते हैं। आप हमारी शक्ति बनेंगे। मैं तीनों दिन यहां बैठने वाला हूं। जब जनता इतनी बड़ी संख्या में आती है, तो वो स्वयं एक शक्ति का रूप होती है। मैं आप सभी का ध्यान्यवाद करता हूं। मैं समापन के समय अपने मन की बाकी की बातें कहूंगा। जय गुजरात
10:25 बजे। मोदी ने अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने सबसे पहले सभी को सादर धन्यवाद दिया।
10 बजे। नरेंद्र मोदी उपवास के लिए विश्वविद्यालय पहुंचे। उनके साथ प्रकाश सिंह बादल, प्रेम कुमार धूमल समेत कई नेता पहुंचे।
9:45 बजे। मोदी अपनी मां नरमदा बाई से मिले और आशीर्वाद लिया।
9:30 बजे। शंकर सिंह वाघेला साबरमती में फुटपाथ पर उपवास पर बैठ गये।
सुबह 8:30 बजे। मोदी के उपवास के समानांतर कांग्रेसियों ने भी बाहर अपना उपवास शुरू कर दिया है। कांग्रेसी नेता शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि मोदी चाहे जो कुछ भी कर ले लेकिन वो जनता को बेवकूफ नहीं बना सकते हैं। वाघेला
सुबह 8 बजे। गुजरात विश्वविद्यालय के एक्जिबिशन हॉल में मोदी के उपवास की तैयारियां अंतिम चरण पर चल रही हैं। यहां पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री डॉ. जे जयललिता, तमिलनाडु सरकार के मंत्री डॉ.मैत्रेयन, एआईडीएमके के राज्यसभा सांसद वी.मैत्रेयान, एमपी थिम्बुदुराई समेत तमाम भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के आने की उम्मीद है, लिहाजा सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद है।












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