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अमेरिका भी नहीं उखाड़ पाया अफगानिस्‍तान से तालिबान की जड़ें

Taliban Challenges America by targeting American Embassy and NATO in Kabul
बेंगलूरु। तालिबान ने अफगानिस्‍तान की राजधानी काबुल में अमेरिकी दूतावास पर आतंकी हमला कर अमेरिका को फिर से चुनौती दे डाली है। अफगानिस्‍तान से तालिबान की जड़ें उखाड़ने के लिए अमेरिका ने 10 सालों तक वहां अपनी सेनाएं जुटाए रखीं। अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने हाल ही में घोषणा की थी कि अब अफगानिस्‍तान में शांति बहाली हो चुकी है। जिस वजह से अमेरिका और नाटो सेनाओं को वहां से वापस बुलाया जाएगा। तालिबान ने अफगानिस्‍तान की राजधानी में अमेरिकी दूतावास और नाटो कार्यालय को निशाना बनाकर ओबामा के शांति बहाली के दावों की हवा निकाल दी है।

अभी 2 दिन पहले ही अमेरिका ने अपने यहां हुए 9/11 आतंकी हमले की दसवीं वर्षगांठ मनाई है। इस आतंकी हमले को अलकायदा ने अंजाम दिया था। जिसका सरगना ओसामा बिन लादेन था। ओसामा अफगानिस्‍तान में छिपा बैठा था जिसे तालिबान ने शरण दी थी। ओसामा उस समय तालिबान की रणनीतियों के मुख्‍य कर्ता-धर्ता में से एक था। अमेरिका ने 2001 में तालिबान का शासन उखाड़ने और ओसामा को पकड़ने के लिए अपनी सेनाएं अफगानिस्‍तान भेज दीं। अमेरिका को नाटो सेनाओं का भी सहयोग मिला।

अफगानिस्‍तान पर हमला करने से पहले अमेरिका ने तालिबान से ओसामा बिन लादेन को सौंपने की मांग की थी। जिसे तालिबान सेना ने ठुकरा दिया था। तालिबान ने अफगानिस्‍तान में अमेरिका के कहे अनुसार प्रतिबंध लगाने की मांग को भी ठुकरा दिया। इसके बाद अमेरिका ने तालिबान को नेस्‍तानाबूत करने के लिए सेनाओं की हवाई बंमबारी शुरू कर दी। ओसामा को पकड़ने और अफगानिस्‍तान से तालिबानी सेना की जड़ें उखाड़ने के लिए अमेरिकी सेनाओं को जमीन पर उतरना ही पड़ा। इसमें कभी तालिबान को मदद करने वाले पाकिस्‍तान ने अमेरिका का साथ दिया।

इस हमले के बाद अफगानिस्‍तान से तालिबानी सेनाएं तितर-बितर हो गईं। इसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्‍तान में लोकतंत्र बहाल करवाया और हामिद करजई वहां के राष्‍ट्रपति बने। 2001 से लेकर अभी तक तालिबानी सेना गुप-शुप तरीके से अफगानिस्‍तान में आतंक मचाती रहीं। दसा साल अफगानिस्‍तान में खाक छानने के बाद भी अमेरिकी सेनाएं तालिबानियों का सफाया नहीं कर पाईं।

इसके बाद अमेरिका को एक बड़ी कामयाबी मिली। अमेरिका पर आतंकी हमला करने वाला ओसामा बिन लादेन उसके हत्‍थे चढ़ा। अफगानिस्‍तान में ओसामा की खोज में लगी अमेरिकी सेनाओं को ओसामा पाकिस्‍तान के एबटाबाद में मिला। जिसे अमेरिका की सेना ने 2 मई को मार गिराया। इस तरह अमेरिका का 'मिशन ओसामा' पूरा हो गया। लेकिन आतंकवाद के खात्‍मे के लिए अमेरिका का अफगानिस्‍तान में चल रहा मिशन कामयाब नहीं हो पाया है।

अफगानिस्‍तान में तालिबान की जड़ें फिर पनपने लगी हैं। खास बात यह है कि पाकिस्‍तान जो कि आतंकवाद के खात्‍मे में खुद को अमेरिका का साथी मानता है उसने तालिबान को मंजूरी दे हुई है। इस जमात में सऊदी अरब और यूनाईटेड अरब अमीरात का नाम भी श‍ामिल है। अब सवाल यह है कि क्‍या अमेरिका को अफगानिस्‍तान से अपनी सेनाएं वापस बुलाने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए? पिछले 10 साल से अमेरिका जो लड़ाई लड़ रहा था वह आतंकवाद के खिलाफ थी या फिर ओसामा बिन लादेन के खिलाफ?

क्‍या आपको लगता है कि अमेरिका द्वारा अफगानिस्‍तान से तालिबान के सफाए के लिए चलाया गया मिशन असफल हो गया है। आप अपनी राय से हमें अवगत कराएं। अपनी राय हम तक पहुंचाने के लिए नीचे दिए हुए कमेंट बॉक्‍स में लिखें। हमें आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।

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