यूपी: चुनाव में राजनीतिक समीकरण बिगाड़ सकती है अन्ना मुहिम

इस मुहिम के दौरान केन्द्र सरकार के खिलाफ लोगों को गुस्सा देखते ही बनता था। अब बारी यूपी की है जहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले है। खबर यह है कि अन्ना हजारे आने वाले समय में यूपी पधारेंगे ऐसे में यदि उनका दौरा विधानसभा चुनाव के दौरान हुआ तो राजनैतिक दलों को उसके भयंकर परिणामों से दो चार होना पड़ सकता है।
ऐन चुनाव के वक्त उनका सम्भावित अभियान राजनीतिक दलों मे अभी से बेचैनी बढ़ा रहा है। दरअसल देश की सबसे बड़ी विधान सभा के चुनाव दिल्ली के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जनलोकपाल बिल को लेकर कांग्रेस वैसे ही जनता की आंखों की किरकिरी बन चुकी है। यदि चुनाव के दौरान अन्ना की मुहिम शुरू हो गयी तो कांग्रेस को खासा नुकसान हो सकता है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी वैसे तो अन्ना के अभियान को समर्थन देने की बात कर रही है लेकिन यदि उसने उ मीदवार चयन में जरा भी लापरवाही की तो उसे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। सूत्रों की मानें तो अन्ना प्रदेश चुनाव में सभी दलों के स्वच्छ छवि वाले प्रत्याशियों के लिए प्रचार भी कर सकते हैं। प्रदेश की राजनीति में यह पहला मौका होगा कि एक ही व्यक्ति सभी दलों के प्रत्याशियों का प्रचार करे।
इससे पूर्व राजनीतिक दल प्रचार के लिए फिल्मी सितारों का सहारा लेते रहे हैं लेकिन यह सितारे भी किसी पार्टी विशेष के लिए ही प्रचार करते रहे हैं। अन्ना टीम से जुड़े लोगों का कहना है कि अन्ना का मकसद यह है कि स्वच्छ छवि वालों को ही जनता चुने, इसी कारण वह सभी दलों के स्वच्छ छवि वाले प्रत्याशियों का प्रचार कर सकते हैं।
वहीं सपा व बसपा ने अधिकतर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। ऐसे में चुनाव के दौरान अन्ना के दौरे की खबर इन दलों में खलबली मचा रहा है। अब तक बाहुबल व धनबल के दम पर राजनीति दल चुनावी बाजी जीतते आ रहे हैं, अन्ना मुहिम उनके इन मंसूबों पर पानी फेर सकती है। इन दलों के सामने समस्या यह है कि आखिर वह स्वच्छ व बेदाग छवि वाले प्रत्याशी कहां से लायें।












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