सारंगी से मिलते हैं अन्ना हजारे के सुर
वहां से वे निकले तो एक बार फिर अन्ना से टेलीफोन पर बात की। कहने का लब्बोलुबाब यह है कि सारंगी इस पूरी मुहिम में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं। वह इससे पहले भी पांच बार आंदोलनरत अन्ना को मनाने में कामयाब रहे हैं। 1977 बैच के आईएएस अधिकारी सारंगी नासिक में कलक्टर रहते हुए पहली बार अन्ना के संपर्क में आए थे।
केंद्र के आग्रह पर महाराष्ट्र के मुख्यमंद्दी पृथ्वीराज चह्वाण ने उमेशचंद्र सारंगी को अन्ना से बातचीत के लिए भेजा। हालांकि नागरिक समिति के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने इसे केवल अनौपचारिक बातचीत की संज्ञा दी है। गौरतलब है कि सारंगी इन दिनों राज्य के अतिरिक्त गृहसचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, और इससे पहले भी वह कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
सारंगी ने 1991-94 में कृषि निदेशक, 1999-2000 में पशुपालन व दुग्ध विकास सचिव और 2003-05 में कोआपरेटिव सोसाइटी के रजिस्ट्रार के रूप में अन्ना को हमेशा सहयोग दिया। वहीं अन्ना ने भी सारंगी की ईमानदारी पर कभी संदेह नहीं किया। यही कारण है कि अन्ना हजारे के आंदोलनों को पिछले दो दशक से झेल रही महाराष्ट्र की विभिन्न सरकारों ने हमेशा बातचीत के लिए सारंगी का ही सहारा लिया। सारंगी अपनी वर्तमान जिम्मेदारी से पहले कृषिमंत्री शरद पवार की पसंद से कई वर्ष तक नाबार्ड के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
बताया जाता है कि बीते अप्रैल माह में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले अन्ना के अनशन के समय भी सारंगी की मदद ली गई थी। अब पुन: सारंगी उन्हें मनाने में लगे हैं।













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