जांच के लिए निगमानंद का शव समाधि से निकाला जाएगा

सूत्रों के मुताबिक सीबीआई निगमानंद के शव को समाधि से बाहर निकालेगी ताकि फॉरेंसिक जांच से यह पक्का किया जा सके कि उन्हें जहर दिया गया था या नहीं। गौरतलब है कि साधु समाज के नियम के मुताबिक निगमानंद को समाधि दी गई थी। एजेंसी ने एफआईआर में हरिद्वार की पत्थर तोड़ने वाली कंपनी हिमालयन स्टोन क्रशर के मालिक ज्ञानेंद्र कुमार और जिला अस्पताल के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. पीके भटनागर को हत्या और साजिश के लिए नामजद किया है।
एफआईआर में यह भी लिखा है कि निगमानंद को 27 अप्रैल को हरिद्वार के सरकारी जिला अस्पताल में भर्ती करने के बाद एक महिला कर्मचारी ने जहर का इंजेक्शन दिया। शक है कि वह इंजेक्शन आर्गेनोफॉस्फेट नाम का एक कीटनाशक था। यह एफआईआर निगमानंद के साथी ब्रह्मचारी दयानंद कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। सूत्रों के मुताबिक दयानंद ने सीबीआई को बताया कि वह हरिद्वार के आसपास गंगा किनारे पत्थर तोड़ने वाले माफिया की नजर में चढ़ गए थे।
गौरतलब है कि गंगा में अवैध खनन के खिलाफ निगमानंद 27 फरवरी को अनशन पर बैठ गए थे। करीब 75 दिन के अनशन के बाद उनकी तबियत बिगड़ने लगी और उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। उनकी मौत के बाद दयानंद कुमार सहित पूरे साधु समाज की लगातार शिकायत के बावजूद स्थानीय पुलिस ने इस मामले में की कोई सुध नहीं ली थी।












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