चारा खाए लालू को सीबीआई कोर्ट से राहत नहीं

अपना फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा कि याचिका में ऐसा कोई सुबूत नहीं जुटाया गया जिससे यह साफ हो कि ये लोग इसमें आरोपी नहीं हैं। इस मामले में 1996 में कुल मिलाकर 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। इनके खिलाफ 2003 में मामला दर्ज किया था। यह मामला भागलपुर का है। जहां फर्जी कागजों की मदद से कोषागार से लगभग 43 लाख रुपए निकालने का मामला सामने आया था। इस मामले में अभी 34 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही है। जबकि बाकी कुछ फरार हैं और कुछ की मौत हो चुकी है जबकि 6 लोग सरकारी गवाह बन गए हैं।
कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में सरकारी अफसरों और नेताओं की मिलीभगत के कारण ही यह घोटाला हुआ था। इसमें सप्लायर से लेकर नेतागढ़ और नौकरशाह शामिल थे। बंदरबांट के इस खेल में मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी शामिल थे। इस घोटालें में राजनेताओं की ही मुख्य भूमिका थी। इस मामले में लालू सहित 11 अन्य ने याचिका दायर की थी जिसे खारिज कर दिया गया था।












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