अन्ना की नीति के आगे बेबस सरकार की रणनीति

सूत्रों ने बताया कि टीम अन्ना सरकार के हर कदम को पहले से आंकने में लगी हुई है। सोमवार को इसे भनक लग गई कि मंगलवार की सुबह अनशन शुरू होने से पहले किसी भी समय अन्ना टीम की गिरफ्तारी हो सकती है। इसलिए दोपहर में ही टीन अन्ना ने मयूर विहार में अपना वीडियो संदेश रिकार्ड कर लिया। इसके बाद एक कार्यकर्ता तत्काल उसे लेकर वीडियो एडिटिंग करवाने निकल गया औऱ उसकी कई कापियां बनवाई गईं। ताकि समय आने पर उसे मीडिया को सौंपा जा सके। इसी तरह अपने मौलिक अधिकारों के हनन के खिलाफ अदालत जाने का विचार भी एकाएक बदल दिया गया।
प्रशांत भूषण ने कहा कि चूंकि बड़ी तदाद में लोगों का समर्थन मिल रहा है, इसलिए इसे राजनीतिक लड़ाई के तौर पर ही लड़ने पर विचार किया जा रहा है। दरअसल, अदालत में आवेदन से यह खतरा भी था कि अदालत उनसे सवाल कर देती कि जब आप हमारे पास आए हैं तो फिर सड़कों पर क्यों उतर रहे हैं। सोमवार को ही टीम अन्ना की कोर कमेटी ने यह भी तय कर लिया था कि अन्ना सहित आंदोलन के दूसरे पंक्ति के सभी लोग गिरफ्तारियां देंगे, लेकिन तीसरी पंक्ति के लोगों को खुद को बचा कर रखना है। इसके लिए उन्हें अलग-अलग जगह भूमिगत हो जाने का निर्देश है। इस तरह ये लगभग दो दर्जन लोग आंदोलन से जुड़े संदेश समर्थकों, मीडिया और जनता के बीच तक पहुंचा सकेंगे।
वहीं जब तिहाड़ में अन्ना की टीम को पता चला कि सरकार ने उन्हें रिहाई का आदेश जारी कर दिया है तक उन्होंने तत्काल अपनी रणनीति बदल दी और नई रणनीति के तहत उन्होंने सरकार को एक बार फिर झुकाने के लिए जेल से बाहर जाने से मना कर दिया। यही नहीं टीम अन्ना अब सरकार से अंडरटेकिंग मांग रही है कि उसे बिना शर्त जेपी पार्क में अनशन करने दिया जाए। अब देखना है कि टीम अन्ना को इसमें कितनी सफलता मिलती है पर सूत्र बता रहे हैं सरकार झुकती जा रही है संभव है कि कोई नाटकीय घटनाक्र के बाद जनलोकपाल बिल पर कुछ नया फैसला कर दे।












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