हरियाणा में कक्षा 9 से 12 तक रोजगारपरक पाठ्यक्रम

Vocational courses in Haryana schools
चंडीगढ़। हरियाणा के स्कूली बच्चों को रोजगार की चिंता नहीं रहेगी क्योंकि अब प्रदेश सरकार ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है जिससे 12वीं कक्षा के बाद बच्चों को रोजगार मिलने लगेगा। सरकार जल्द ही प्रदेश के स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा तक ऐसे व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की शुरूआत करने जा रही है जोकि बच्चों को रोजगार के सुनिश्चित अवसर उपलब्ध करवाने में मददगार होंगे।
यह जानकारी प्रदेश की शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग तथा राष्टi्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के सहयोग से प्रदेश में राष्ट्रीय व्यवसायिक शिक्षा योग्यता रूपरेखा (एनवीईक्यूएफ) नामक पायलट परियोजना को लागू करने के उद्देश्य से आयोजित शिक्षा विभाग के अधिकारियों तथा शिक्षा विशेषज्ञों की एक बैठक में दी।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि स्कूलों में व्यवसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने परियोजना पर देशभर के शिक्षा मंत्रियों की नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक में निर्णय लिया गया था और इस पायलट परियोजना के रूप में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने हरियाणा का चयन किया है।

उन्होंने बताया कि पायलट परियोजना की सफलता पर इसे प्रदेश के सभी स्कूलों तथा बाद में देशभर में लागू किया जायेगा। उन्होंने बताया कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा क्रमश: 75 एवं 25 के अनुपात में वित्तपोषित इस परियोजना के लिए राज्य सरकार ने केन्द्र से 110 करोड़ रुपये की मांग की है।

160 सीनियर सेकेंड्री स्‍कूल बनेंगे

भुक्कल ने बताया कि परियोजना के प्रारंभिक चरण में राज्य के 160 सीनियर सेकेंड्री स्‍कूलों में स्थानीय आवश्यकताओं, प्रायोगिक सुविधाओं तथा प्रशिक्षित संकाय की उपलब्धता के आधार पर वैकल्पिक पाठ्यक्रम के रूप में शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत राष्टi्रीय व्यवसायिक शिक्षा योग्यता रूपरेखा का चार स्तरीय पाठ्यक्रम कक्षा 9वीं तथा कक्षा 11वीं में शुरू होंगा।

साधारण रूप में इस पाठ्यक्रम का प्रथम स्तर 9वीं कक्षा में प्रारंभ होगा तथा कक्षा-12 उत्तीर्ण करने पर चौथा स्तर पूरा होगा। लेकिन 11वीं कक्षा में पाठ्यक्रम शुरू करने वाले विद्यार्थी को चारों स्तर दो वर्षों में पूरे करने होंगे, जिसके आधार पर उसे प्रमाण-पत्र दिया जायेगा।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना से बच्चों द्वारा बीच में पढ़ाई छोडऩे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा क्योंकि जल्द रोजगार प्राप्त करने की उत्सुकता बच्चों को पढ़ाई छोडऩे के लिए मज़बूर करती है लेकिन तकनीकी रूप से कुशल न होने के कारण ऐसे बच्चे रोजगार के अवसरों का लाभ ठीक ढंग से नहीं उठा पाते। शिक्षा मंत्री ने कहा कि केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री ने यह परियोजना बच्चों की इसी 'ड्रॉप आउट' प्रवृत्ति को कम करने तथा स्कूली शिक्षा के बाद बच्चों के लिए रोजगार के अवसरों को सुनिश्चित बनाने के लिए तैयार की है।

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