उत्तर प्रदेश: घाघरा पर बना एल्गिन बांध टूटा कई गांव बाढ़ की चपेट में

प्रदेश में बाढ़ का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। पानी के दवाब के कारण रायपुर गांव के पास एल्गिन बांध का करीब 50 मीटर का हिस्सा नदी के कटान से बह गया। बांध टूटने से बाराबंकी के 15 गांव समेत लगभग 65 गांवों की दो लाख आबादी और एक हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि प्रभावित हुई है। नदी के कटान के चलते बाराबंकी की ओर बने बांध को खतरा पैदा हो गया है। बांध के कटने से बाढ़ का खतरा और बढऩे की सावन को देखे हुए प्रशासन ने तटवर्ती सभी ग्रामीणों को गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है।
उधर गांव में फंसे ग्रामीणों को नाव और गोताखोरों की मदद से निकाला जा रहा है। बाढ़ चौकियों पर पीएसी को आपदा बचाव और राहत तंत्र के साथ तैनात किया गया है। सरयू नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इस क्षेत्र में नदी के तट पर बसे गांवों के निचले हिस्सों में पानी भरा हुआ है। बलरामपुर में भी राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर और पहाड़ी नालों के उफनाने से लगभग 25 गांव पानी से घिर गये हैं। वहीं पिछले वर्ष राप्ती नदी के प्रकोप से बेघर हुए लगभग बीस परिवारों का पुनर्वास न होने से अभी तक पटरियों पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। तुलसीपुर तहसील इलाके के खरझार में बाढ़ के चलते व नालों के उफनाने से लगभग 15 गांवों में संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। जलनिकासी की व्यवस्था के साथ राहतकॢमयों को बचाव कार्य में लगा दिया गया है।
केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार अयोध्या और बलिया में घाघरा का जलस्तर स्थिर बना हुआ लेकिन खतरे के निशान से ऊपर है। कुवानों नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। पलियाकलां और खीरी में शारदा का जलस्तर बढ़ रहा है। यमुना का जलस्तर मथुरा, आगरा, इटावा में बढ़ रहा है जबकि राज्य के अन्य स्थानों से इसके घटने की सूचना है। धाॢमक नगरी वाराणसी में गंगा और वरूणा नदी का जलस्तर हालांकि घट रहा है लेकिन इनके तटीय इलाकों में रहने वालों की मुश्किलें बरकरार है। वाराणसी का आकर्षण गंगा आरती अब घाट की सीढिय़ों के बजाय सड़क पर हो रही है। गंगा के तेज बहाव के कारण नाव के संचालन पर रोक लगी हुई है।
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