सिर्फ विपक्षियों पर चलता है मायावती का डण्डा

Uttar Pradesh : Mayawati only hard against Opposition
लखनऊ। सीएमओ हत्याकाण्ड में तो मुख्यमंत्री ने कोई के दबाव में सीबीआई जांच की हामी भर दी लेकिन प्रदेश के इतिहास में ऐसा कम ही हुआ है जब मायावती ने अपने शासन में हुई किसी घटना की जांच सीबीआई को सौंपने की बात की हो। मायावती ने का निशाना हमेशा विपक्षी दल ही रहे। कांग्रेसी नेता अर्जुन सिंह पर दहेज हत्या का मामला हो या फिर मुलायम सरकार में हुआ खाद्यान्न घोटाला मायावती ने सत्ता संभालते ही इन सबकी जांच सीबीआई कें सौंप दी।

मायावती ने 2007 में प्रदेश की कमान अपने हाथ में ली थी जिसके बाद मुलायम सरकार के किए गये कार्यों की समीक्षा की गयी और फाइलें खंगाली गयीं। इस वर्ष उन्होंने मुलायम सरकार में हुए नोएडा आवंटन में धाधंली की बात कहकर जांच सीबीआई को सौंप दी। फिर मौका आया बसपा विधायक राजू पाल हत्याकाण्ड की जांच की। राजू पाल मुलायम सरकार के शासन काल में इलाहाबाद से बसपा के विधायक थे। माया सरकार ने मई 2007 में ही राजू पाल हत्याकाण्ड की जांच सीबीआई को सौंप दी।

मायावती के निशाने पर हमेशा मुलायम सरकार रही और इलाहाबाद के मदरसा काण्ड जिसकी चर्चा देश विदेश तक रही। ज्ञात हो कि इलाहाबाद के एक मदरसे में लड़कियों से बलात्कार का मामला प्रकाश में आया था। सत्ता में आने के बाद माया सरकार ने इस प्रकरण की भी जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति कर दी। मुलायम के बाद माया सरकार के निशाने पर आए कांग्रेसी नेता अर्जुन सिंह जिनके खिलाफ मुरादाबाद में दहेज उत्पीडऩे का ममला दर्र्ज हुआ था। जुलाई माह में मामले की समीक्षा करने के बाद मायावती ने इसकी जांच भी सीबीआई से कराने का निर्णय लिया।

इसके उपरान्त मायावती का याद आया मुलायम सरकार के समय में हुए खाद्यान्न घोटाला जिसकी जांच के लिए सीबीआई को दिसम्बर 2007 में पत्र लिख दिया गया। इसके बाद फंसे बसपा विधायक आनन्द सेन। आनन्द सेन पर शशि नाम की लड़की के अपहरण का आरोप था। प्रकरण में माया सरकार ने सीबीआईजांच की संस्तुति तो की परन्तु सीबीआई ने इस स्वीकार नहीं किया। कारण जो भी रहे हों लेकिन विपक्षियों ने आरोप लगाया कि ऐसा जानबूझकर किया गया।

वर्ष 2008 में मायावती को पुलिस भर्ती की बात आयी फिर क्या था पुलिस भर्ती की पुरानी फाइलें खोल दी गयी और देखते ही देखते एक और घोटाला जनता के सामने आ गया। मामले की जांच सीबीआई को फरवरी 2008 में सौंप दी गयीं। पुलिस भर्ती में सैकड़ों लोगों से पैसा लिए जाने का अरोप लगा लेकिन जांच शुरू होते ही लोगों का पैसा डूब गया।

पुलिस भर्ती घोटाले के बाद इसी वर्ष किडनी काण्ड खुला जब पंजाब के एक नर्सिंग होम पर आरोप लगा कि उसने मुरादाबाद के निर्धन लोगों के इलाज के नाम पर किडनी निकाल ली। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने सीबीआर्ईजांच की संस्तुति कर दी। इसी वर्ष अनपरा से उन्नाव तक पारेषण लाइन का एक अनोखा प्रकरण प्रकाश में आया। आरोप लगा कि 800 केवी की विद्युत लाइन के बीच में लगे टावरों की पेंटिंग कराने विभग ने करोड़ों रुपये खच्र कर दिए। कुछ संगठनों ने इसकी जांच की बात कहीं तो सरकार ने इसकी भी सिफारिश कर दी।

अनपरा के बाद मायावती ने डुमुरियागंज में नकली नोट चलाने की जांच के लिए वर्ष 2008 में सीबीआई से जांच की सिफारिश की गयी। उपरोक्त सभी प्रकरण बताते हैं कि मायावती ने आम तौर पर उन्हीं मामलों में सीबीआर्ई जांच की सिफारिश की जिसमें उनका कोई करीबी न फंस रहा और न ही उनकी सरकार की छवि खराब हो रही हो। विधायक आनन्द सेन के प्रकार को छोड़ देते मायावती सरकार ने हमेशा अपने मंत्रियों व विधायकों का साथ दिया है।

एक और प्रकरण प्रदेश में काफी चर्चित रहा वह था लखीमपुर निघासन काण्ड जिसमें एक मासूम बच्ची की पुलिस परिसर में हत्या की गयी कहा गया कि हत्या से पूर्व नाबालिग के साथ बलात्कार किया गया लेकिन इसकी पुष्टि न हो पायी। इस मामले में भी सीबीआई से जांच की बात की गयी लेकिन माया सरकार ने कुछ पुलिस वालों को निलम्बित कर मामला ठण्डे बस्ते में डाल दिया।

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