मुंबई बम ब्‍लास्‍ट: सैकड़ों बेगुनाहों के खून से हाथ रंग चुका है इंडियन मुजाहिद्दीन

Mumbai Bomb Blast: Indian Mujahideen is culprit of killing of hundreds people
मुंबई। मुंबई में हुए सि‍लसिलेवार बम विस्‍फोटों में इंडियन मुजाहिद्दीन के हाथ होने की शंका जाहिर की जा रही है। शक जाहिर होने का कारण सिर्फ तारीख और तरीका है। हालाकि भारत के सुरक्षा एजेंसियों ने यह दावा किया है कि वर्तमान में इंडियन मुजाहिद्दीन उस स्थिति में नहीं है कि हमला कर सके। मगर बार-बार भारत पर हमला कर उसके सीने को छलनी कर इस संगठन ने अपनी ताकत का अंदेशा पहले ही दे चुका है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि भारत की सुरक्षा व्‍यवस्‍था में चूक हो जाती है मगर इस संगठन का नेटवर्क कभी कमजोर क्‍यों नहीं पड़ता?

अब तक इंडियन मुजाहिद्दीन ने भारत के अलग-अलग राज्‍यों में कई बार धमाके कर लगभग 500 लोगों की जान से खेल चुका है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो इस संगठन ने सैकड़ों बेहगुनाहों के खून से अपना हाथ धोया है। जानकारों का यह भी मानना है कि इस संगठन के तार पाकिस्‍तान से भी जुड़े हैं। अगर मुद्दे की बात करें तो इंडियन मुजाहिदीन को प्रतिबंधित सिमी और पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर का मुखौटा माना जाता है। दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश और बैंगलोर के कई ब्लास्ट में इंडियन मुजाहिदीन का नाम शामिल रहा है।

सरकार ने इंडियन मुजाहिदीन को गैर कानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत आतंकवादी संगठनों की लिस्ट में डाला है। गौरतलब है कि जेहाद के नाम पर बेगुनाहों का खून बहाने वाले इस आतंकी संगठन का नाम सबसे पहले 23 फरवरी 2005 को उस वक्त चर्चा में आया जब उसने वाराणसी में ब्लास्ट किया था। इस ब्लास्ट में 8 लोग घायल हुए थे। इस विषय के जानकारों की मानें तो इंडियन मुजाहिदीन पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के हाथ की कठपुतली है और पिछले कई सालों से इंडियन मुजाहिदीन सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाला आतंकी संगठन बनकर उभरा है।

गौरतलब है कि पिछले पांच सालों में इंडियन मुजाहिद्दीन का नाम भारत में हुए 10 बड़े हमलों में आया है। इंडियन मुजाहिद्दीन की तरफ से जो हमला किया गया उसमें सबसे अ‍हम वर्ष 2005 का हमला है। वर्ष 2005 में दीपावली से ठीक पहले दिल्‍ली सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल उठी थी। इस हादसे में 66 लोगों की मौत हुई थी। खास बात यह है कि इस हादसे में भी इंडियन मुजाहिद्दीन के हाथ होने के सबूत पाये गये थे।

2006 में मुंबई लोकल ट्रेन में सीरियल धमाके, 187 लोगों की मौत। 2007 में लखनऊ, वाराणसी, फैजाबाद कोर्ट में सिलसिलेवार धमाकों में 18 लोगों की मौत। जानकारों का कहना है कि इंडियन मुजाहिदीन की हमेशा यही कोशिश रही कि ऐसी जगह हमला किया जाए जहां ज्यादा से ज्यादा लोग जमा होते हों। 2008 को जयपुर में ब्लास्ट हुए, इसमें 80 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए। 2008 में ही बैंगलोर ब्लास्ट में दो लोगों की मौत हुई। ऐसे कई हादसे इंडियन मुजाहिद्दीन ने किये जिसमें बेगुनाहों के खून बहे।

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