यह सरकार का आखिरी फेरबदल: मनमोहन सिंह

इस मुद्दे पर द्रमुक को सोचना है कि वह क्या करती है। हमारी तरफ से कोई दिक्कत नहीं है। तो फिर क्या सरकार झूठ बोल रहे हैं या फिर किसी को अंदर ही अंदर उन्होंने धमकाया। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अपने घर में उठापटक से परेशान है क्योंकि कैबिनेट में फेरबदल पर दो मंत्रियों गुरुदास कामत और श्रीकांत जेना ने शपथ ग्रहण समारोह का विरोध किया और उन दोनों ने शपथ ग्रहण समारोह में भाग नहीं लिया। इस उत्तर को इसी परिपेक्ष्य में देखा जा रहा है।
सूत्रों कहा कहना है कि इन दोनों मंत्रियों के फैसले से खुद प्रधानमंत्री नाराज है, वैसे उन्होंने यह कहते हुए अपनी नाराजगी प्रकट भी कर दी कि हर कैबिनेट फेरबदल के बाद कुछ लोगों की नाखुशी स्वाभाविक है। ऐसी भावनाओं का इजहार होता ही है। लेकिन देश के हित में जो सबसे बेहतर है वही किया गया है।
मनमोहन सिंह का मानना है कि इस फेरबदल के बाद उनकी सरकार के प्रति लोगों का जो विश्वास कम हुआ है, वह वापस लौटेगा औऱ सरकार की साख बढ़ेगी। वैसे अपने इस वक्तव्य से उन्होंने कांग्रेस के उन नेताओं के मंसूबों पर भी पानी फेर दिया जो अंदर ही अंदर एक साल के भीतर अपनी पारी का इंतजार कर रहे थे। राहुल गांधी को कैबिनेट में शामिल करने के मुद्दे पर जब प्रधानमंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं उनसे कई मौकों पर मंत्री पद संभालने की गुजारिश कर चुका हूं, लेकिन अभी वे संगठन के लिए काम करना चाहते है।
उन्होंने कहा कि फेरबदल में सूबों के संतुलन का विशेष ख्याल रखा गया है। पर्यावरण मंत्रालय की जगह ग्रामीण मंत्रालय दिए जाने से जयराम रमेश की नाराजगी पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि रमेश को और अच्छा दायित्व सौंपा गया है जहां भी कुछ कर दिखाने की संभावनाएं कम नहीं हैं। बल्कि काफी बड़ा दायरा उन्हें दिया गया है। राहुल गांधी की उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हुई पदयात्रा पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी पदयात्रा किसानों की समस्याओं को समझने का उनका एक प्रयास था।












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