वाई एस आर की तरह पदयात्रा करके सत्ता हासिल करना चाहते हैं राहुल गांधी!
अगले साल देश के सबसे ज्यादा जनंसख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके मद्देनजर प्रदेश में सारी पार्टियों ने सुचारू रूप से काम करना शुरू कर दिया है। लेकिन कांग्रेस का युवराज औरों की तरह राजनीति नहीं कर रहा है। वो अचानक प्रदेश के भट्टा परसौल पहुंच जाता है और प्रदेश के किसानों को अपना भाई बनाने मे जुटा है। आखिर वो चाहता क्या है?
ये बाते हर किसी के दिमाग में चल रही है, विरोधी पार्टियो के निशाने पर रहने वाले राहुल को लोग बच्चा कहते हैं लेकिन क्या यही बच्चा उस व्यक्ति की नकल कर रहा है जिसे भारतीय राजनीति का स्वर्णिम पुरूष कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं आंध्रप्रदेश की दिंवगत मुख्यमंत्री वाई एस आर रेड्डी की। जिन्हें लोग उनके प्रदेश में मसीहा मानते थे खास तौर पर किसान लोगों के लिए वो किसी खुदा से कम नहीं थे।
वाई एस आर की ही देन है कि आज पूरे भारत में सबसे समृद्ध किसान आंध्रप्रदेश का है क्योंकि उसकी जमीन सबसे ज्यादा दाम वाली है। लेकिन वाई एस आर को भगवान का दर्जा यूं ही नहीं मिला है, इसके लिए उन्होंने काफी तपस्या की थी। खुद वाई एस आर ने प्रदेश के उन इलाकों में तीन महीने पद यात्रा की थी जहां पहुंचना हर किसी के बस में नहीं था | चिलचिलाती गर्मी में पदयात्रा करके वाई एस आर ने उस वर्ग को अपना बना लिया था जिन्हें तत्कालीन नायडू सरकार ने नजर अंदाज कर दिया था।
नतीजा ये हुआ कि वाई एस आर ने आंध्रा में लगभग अधमरी हो चुकी कांग्रेस सरकार को जिंदा कर दिया और आज की तारीख में वाई एस आर भारतीय राजनीति में अमर हो चुके है। राहुल की पदयात्रा भी वाई एस आर की याद दिलाती है। उन्होंने भी यूपी के भट्टा परसौल से अपनी तीन दिन की पदयात्रा शुरू की है। गर्मी और उमस भरे मौसम में राहुल अपनी रात उन गांवों में बिता रहे है जहां ना तो बिजली है और ना ही पानी।
गरीब किसानों को अपना भाई बताने वाले राहुल दावा कर रहे है कि उनकी मंशा है कि उत्तर प्रदेश वाकई में उत्तम प्रदेश बनें। प्रदेश की गरीब और बेबस महिला और बच्चियों को अपनी बहन बताने वाले राहुल भी वाई एस आर की तरह मंच पर भाषण नहीं दे रहे हैं। बस लोगों के सामने मौजूदा सरकार की कमियां गिनाने में लगे हैं। खैर वाई एस आर की 2003 की तपस्या तो रंग लायी थी लेकिन राहुल की ये तपस्या का रंग क्या होगा ये तो साल 2012 के चुनावों के बाद पता चल जायेगा।
जहां वाई एस आर के सुपुत्र जगन मोहन रेड्डी राहुल के पिता राजीव गांधी की तरह सत्ता पाने की फिराक में थे| वही राहुल गांधी जगन मोहन की पिता वाई एस आर की तरह लोगों को लुभाने में लगे हैं। जगहन मोहन तो अपनी कोशिश में फेल हो गये है लेकिन राहुल पास होते है या फेल ये तो बस आने वाले चुनावों में पता चल जायेगा। देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल वाई एस आर की तरह किसानो औऱ गरीबों का दिल जीत पाते है या जगनमोहन की तरह लोगों की नजरों से उतर जाते हैं।













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