बसपा में अल्पसंख्यकों से सौतेला व्यवहार: सिराज मेंहदी

पूर्व विधायक सिराज मेंहदी ने शनिवार को बसपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री मायावती को भेजे एक पत्र में श्री मेंहदी ने सरकार में अल्पसंख्यक हितों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया।
सूत्रों के अनुसार उन्होंने पत्र में लिख कि मैं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सदस्य था। मैं बसपा में यह सोचकर आया था कि पार्टी अल्पसंख्यकों के हितों में काम करेगी क्योंकि आपने अल्पसंख्यकों के हित में काम के लिए कमेटी बनाने का वायदा किया था लेकिन सरकार के चार साल से ज्यादा पूरे हो गये हैं और कमेटी नहीं बनी है।
उन्होंने कहा कि वह सोच विचार कर बसपा से इस्तीफा देने का निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए लिखा कि बसपा अब अल्पसंख्यकों के हितों के बारे में नहीं सोचती है उसे सिर्फ वोट बैंक समझती है। श्री मेंहदी का कहना है कि उनकी कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी से वार्ता हो चुकी है।
उनके करीबी बताते हैं कि अब श्री मेंहदी एक दो दिन में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे तथा उसके बाद कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा करेंगे। सूत्रों का कहना है कि सिराज मेंहदी फिलहाल दिल्ली में हैं।
गौरतलब है कि श्री मेंहदी बसपा के महासचिव और सांसद अखिलेश दास के साथ पार्टी में शामिल हुए थे तथा उनके जाने के बाद अखिलेश दास के बसपा छोड़ कांग्रेस में पुन: जाने की अटकलें तेज हो गयी हैं। फिलहान अखिलेश दास की ओर से ऐसी किसी की आशंका से इनकार किया जा रहा है लेकिन समय के साथ वह अपना निर्णय बदल सकते हैं इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।
गौरतलब है कि श्री दास मजबूरी में बसपा शामिल हुए थे। सूत्रों का कहना है कि अखिलेश दास के प्रदेश में कई ऐसे प्रोजेक्ट चलते हैं जिसके लिए उन्हें सरकार का बनकर रहना जरूरी है।












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