भारत और अमेरिका के संबंध सही ट्रैक पर: अमेरिका

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) द्वारा भारत को छूट दिए जाने का पुरजोर समर्थन करता है। 123 असैन्य परमाणु कानून भी इस जारी बहस में भारत के लिए हमारे समर्थन को रेखांकित करता है और हमारा कानून भी भारत को छूट देता है। रोमर से भारत को एनएसजी द्वारा छूट दिए जाने पर अमेरिकी समर्थन के बारे में पूछा गया था।
46 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह ने पिछले सप्ताह पुनर्संसाधन तकनीक के लिए तकनीक हस्तांतरित करने संबंधी मानकों को और ज्यादा कड़ा करने का निर्णय किया था। इस फैसले का भारत और अमेरिका के बीच हस्ताक्षरित ऐतिहासिक असैन्य परमाणु ऊर्जा समझौते पर असर पड़ने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
रोमर ने कहा कि परमाणु क्षति के लिए पूरक मुआवजे पर संधि (सीएससी) के अनुमोदन और अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धताओं को देखते हुए मुझे आशा है कि असैन्य परमाणु समझौता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता रहेगा। इस तरह के संकेत मिले हैं कि भारत एनएसजी के साथ संपर्क में है और इस समूह द्वारा हाल में लिये गये निर्णय का भारत के एनएसजी के साथ खासतौर पर किये गये समझौते पर गलत असर नहीं पड़ेगा।
अमेरिका रोकेगा हवाईअड्डों पर तलाशी
अमेरिकी हवाईअड्डों पर भारतीय उच्चाधिकारियों की जामा तलाशी के मुद्दे पर रोमर ने कहा कि अमेरिका भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए इन मुद्दों पर काम कर रहा है। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि जब अमेरिकी गृह सुरक्षा के सचिव जैनेट नैपोलिटानो यहां आई थीं, तब उन्होंने कहा था कि हम इस मामले में सुधार का प्रयास कर रहे हैं कि अमेरिका जाने पर किसी मंत्री या वीवीआईपी को इस तरह की घटनाओं का सामना नहीं करना पड़े।
संबंधों में आए सकारात्मक बदलाव
रोमर ने कहा कि बड़े परिदृश्य में देखने पर आप पाते हैं कि पिछले 10 वर्षों में भारत और अमेरिका एक-दूसरे के करीब आए हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम आज खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद से निबटने के क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। हम वैश्विक मुद्दों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं और भारत एवं अमेरिका शांतिपूर्ण अफगानिस्तान चाहते हैं।
महंगाई पर भी बोले रोएमर
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अमेरिका नौ फीसदी बेरोजगारी दर से जूझ रहा है और भारत महंगाई और आधारभूत ढांचे जैसी कुछ चुनौतियों का सामना कर रहा है। हमारा विश्वास है कि अमेरिका आर्थिक सहयोग और आधारभूत ढांचा क्षेत्र में विकास से मदद कर सकता है। इससे दोनों देशों को लाभ पहुंचेगा।












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